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Ghaziabad News: अंतिम क्रिया कराने वाले भी चिता की आग और गर्मी से हुए बीमार

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गाजियाबाद। भीषण गर्मी में श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार कराने वाले तीन कर्मचारी भी चिता के आग की लपट और गर्मी से बीमार हो गए हैं। इस कारण से शवदाह कराने के लिए डेढ़ से दो घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है। गर्मी बढ़ने के साथ ही हिंडन श्मशान घाट पर पहुंचने वाले शवों की संख्या भी दोगुनी हो गई है। पिछले दस दिन से रोजाना 30 से 40 शव का अंतिम संस्कार हो रहा है, जबकि सामान्य दिनों में 15 से 20 शव का अंतिम संस्कार होता था। इसके अलावा रोजाना तीन से पांच अज्ञात शव के भी अंतिम संस्कार हो रहे हैं।
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श्मशान घाट के आचार्य मनीष कुमार ने बताया कि मुखाग्नि के बाद संस्कार और कपाल क्रिया कराने में समय लगता है। सुबह फूल चुगने के बाद प्लेट फार्म की सफाई कराने के बाद दूसरे शव का दाह किया जाता है। उन्होंने बताया कि मंगलवार को 10 बजे से शाम तीन बजे तक पांच घंटे में 36 शव के अंतिम संस्कार किए गए। मनीष ने बताया कि 50 फीसदी मृतकों की उम्र 24 से 40 वर्ष के बीच है। इसके अलावा 40 फीसदी 55 से 70 उम्र और दस फीसदी 42 से 53 वर्ष की उम्र के लोगों के शव क्रिया के लिए लाए जा रहे हैं। क्रिया कर्म कराने में समय लगने और लकड़ी खरीदने में भी लाइन लगानी पड़ रही है।


एक से 18 जून तक 36 अज्ञात शव के हुए अंतिम संस्कार
मनीष ने बताया कि एक जून से 18 जून तक 36 अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार हुए हैं। सभी अज्ञात शव पोस्टमार्टम के बाद धूप और तपती गर्मी में पुलिस लेकर आ रही है। इनका अंतिम संस्कार निशुल्क किया जाता है। बुधवार को 11 शवों का अंतिम संस्कार होगा। हिंदू धर्म के अनुसार जब तक किसी अपनों के द्वारा अंतिम क्रिया कर्म पूरा नहीं कराया जाता है, उनकी आत्मा को मोक्ष नहीं मिल पाता है।
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यह स्थिति दो साल पहले कोरोना में थी
श्मशान घाट के एक कर्मचारी का कहना था कि दस साल से वह शवों के अंतिम संस्कार करवा रहे है, लेकिन गर्मी में इतने अधिक शव पहली बार आ रहे हैं। इसके पहले न तो इतनी अधिक गर्मी पड़ती थी और न ही मई और जून में इतनी मौत होती थी।
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