गाजियाबाद। शहर के बाजारों में अतिक्रमण का जाल परेशानी का सबब बन रहा है। बाजारों में दुकानदार अपनी दुकानों के सामने रेहड़ी-पटरी लगवाकर किराया वसूल रहे हैं। धड़ल्ले से चल रहे अतिक्रमण के खेल पर अंकुश लगाने के लिए नगर निगम योजना तैयार कर रहा है। निगम क्षेत्र में दुकानों के आगे ठीया नहीं लगाया जा सकेगा। वहीं, रेहड़ी-पटरी वालों के लिए वेंडिंग जोन बनाकर स्टॉल आवंटित किए जाएंगे। इनसे किराया भी वसूला जाएगा।
बृहस्पतिवार को नगर निगम बोर्ड कार्यकारिणी की बैठक में अतिक्रमण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। खुद महापौर सुनीता दयाल ने बाजारों में फैल रहे अतिक्रमण के जाल पर चिंता व्यक्त करते हुए अधिकारियों को इसका समाधान तलाशने के निर्देश दिए। बोर्ड कार्यकारिणी बैठक में बताया गया कि दुकानदार एक तय कीमत लेकर रेहड़ी-पटरी वालों को अपनी दुकान के आगे सरकारी जमीन पर दुकान लगाने की इजाजत देते हैं। यह कीमत लोकेशन के अनुसार प्रतिदिन 100 से 1000 रुपये तक या फिर प्रतिमाह 5000 से 15000 रुपये तक वसूली जाती है। लगभग हर बड़े बाजार में सड़क तक अतिक्रमण होने से जाम की स्थिति बनी रहती है। राहगीरों को आने-जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सड़क पर आने-जाने का रास्ता भी काफी कम हो जाता है, क्योंकि सड़क के दोनों तरफ दुकानदार रेहड़ी व पटरी वालों को स्थान देते हैं। इसके बाद ग्राहक आता है तो वह अपने वाहन को भी वहीं पर पार्क करके चला जाता है।
खाली जमीन पर बनेंगे वेंडिंग जोन
बाजारों में सड़कों पर बढ़ रहे अतिक्रमण के साथ नगर निगम की खाली जमीन पर अवैध कब्जों की भी काफी शिकायतें मिल रही हैं। महापौर ने बताया कि निगम की जहां भी खाली जमीन हैं, वहां पर अस्थायी वेंडिंग जोन बनाए जाएंगे। रेहड़ी-पटरी वालों को वेंडिंग जोन में जगह आवंटित करने की एवज में हर महीने किराया लिया जाएगा। किराये का स्लैब तैयार करने के निर्देश निगम अधिकारियों को दिए हैं। दुकानों के आगे रेहड़ी-पटरी लगवाकर किराया वसूलने वाले दुकानदारों पर जुर्माना लगाया जाएगा।
नोएडा की तर्ज पर बनाएं जाएंगे
नोएडा की सड़कों से अतिक्रमण हटाने के लिए प्राधिकरण ने जगह-जगह वेंडिंग जोन बनाए हुए हैं। इसके लिए पहले बाजारों का सर्वे कर वेंडरों की सूची जुटाई गई। इसके बाद ड्रॉ के आधार पर उन्हें वेंडिंग जोन में जगह आवंटित की गई। कई जगह वेंडिंग जोन का प्रयोग सफल भी रहा है। इससे प्राधिकरण को किराये के रूप में राजस्व की प्राप्ति भी हो रही है।
अतिक्रमण से सिकुड़ रहे मुख्य बाजार
शहर के लगभग सभी मुख्य बाजार की चौड़ी-चौड़ी सड़कें अतिक्रमण के कारण सिकुड़ती जा रही हैं। तुराबनगर, घंटाघर, मालीवाड़ा, गांधी नगर, सदर बाजार सहित सभी मुख्य बाजारों में जाम जैसे हालात दिनभर बने रहते हैं। दुकानदार स्वयं दुकान के आगे चार से पांच फुट अतिक्रमण करते हैं या फिर दूसरों से कराकर किराया वसूलते हैं।