बढ़ते प्रदूषण को लेकर इस बार प्रशासनिक अधिकारियों में जागरूकता के साथ ही एनजीटी का खौफ भी साफ नजर आ रहा है। इस बार पटाखा कारोबार के लिए लाइसेंस जारी करने में प्रशासन फूंक-फूंककर कदम रख रहा है।
यही कारण है कि इस बार प्रशासन ने शहर भर में पटाखा कारोबार के लिए सिर्फ 100 अस्थाई लाइसेंस जारी किए हैं। इन अस्थाई लाइसेंस पर सिर्फ चार दिन ही पटाखा बिक्री की जाएगी।
इस मामले में सिटी मजिस्ट्रेट बीडी सिंह का कहना है कि पिछले साल शहर भर में 200 से ज्यादा पटाखा बिक्री के लाइसेंस जारी किए गए थे। बुधवार तक जो आवेदन उनके पास आए थे, उसमें से करीब 100 दुकानदारों को लाइसेंस जारी किया गया है।
इसके साथ ही पटाखा बिक्री के लिए गाइड लाइन भी जारी कर दी गई है। अस्थाई पटाखा बिक्री के लाइसेंस रामलीला ग्राउंड और खुले स्थानों पर ही जारी किए गए हैं। शहर और कालोनी के बीच पटाखा बेचने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि जिन लोगों को लाइसेंस जारी किए गए हैं, उन्हें बता दिया गया है कि अग्निशमन विभाग की गाइड लाइन के अनुरूप ही पटाखा बाजार में दुकानें लगाई जाएंगी। प्रत्येक दुकानदार ड्रम में बालू या रेत और एक बाल्टी रखनी अनिवार्य होगी।
पानी भरा ड्रम भी साथ में रखा जाएगा।, जिससे आगजनी की घटना होने पर तुरंत उस पर काबू पाया जा सके। शहर में रामलीला मैदान घंटाघर, कविनगर, संजयनगर के साथ ही विजय नगर में पटाखा बाजार लगेगा।
जहां बिकेंगे पटाखे, वहां रहेंगी अग्निशमन विभाग की गाड़ियां
आग की घटनाएं रोकने के लिए फायर ब्रिगेड ने कमर कस ली है। शहर में जहां-जहां पटाखे बिकेंगे, वहां-वहां अग्निशमन विभाग की एक गाड़ी मौजूद रहेगी, ताकि आग लगने पर तुरंत काबू किया जा सके।
एफएसओ ने बताया कि दिवाली पर आग बुझाने के लिए शहर में दो वाटर बाउजर, 14 वाटर टेंडर, तीन बोलेरो कैम्पर, छह जीप टोइंग व्हीकल, सात पंप, तीन ट्रेलर/ट्रॉली और एक पलोटो पंप शहर में जगह-जगह मौजूद रहेंगे।
बता दें कि गाजियाबाद में पिछले तीन सालों में ढाई हजार अग्निकांड हुए, जिनमें एक अरब से ज्यादा की संपत्ति राख हुई है। 24 इंसान और सात पशुओं की जान गई है। लोगों को आग से बचने के लिए जागरूक भी किया जा रहा है।
शिवकाशी और फर्रखनगर के पटाखों की धूम
दिवाली के लिए पटाखाें का बाजार सज गया है। कविनगर और घंटाघर रामलीला मैदान में पटाखों की लाइसेंसी दुकानें लगनी शुरू हो गई हैं। विक्रेताओं का कहना है कि जिला प्रशासन की ओर से लाइसेंस बृहस्पतिवार को दिए जाएंगे। इसलिए बिक्री भी तभी से होगी। हालांकि इस बार चाइनीज पटाखे न के बराबर बाजार में आए हैं।
कविनगर रामलीला मैदान में पटाखे की दुकान लगाने वाले अंकुर ने बताया कि इस बार चाइनीज पटाखों का विक्रेताओं ने बहिष्कार किया है। किसी भी दुकान में चाइनीज पटाखा नहीं मिल रहा है। दुकानों पर स्टैंडर्ड, मुर्गा, सोनी, कोर्ननेशन स्वदेशी कंपनियाें के पटाखे हैं।
पटाखों में स्काई शॉट, ट्राई कलर अनार, 10 से 15 हजार लड़ियाें का सेट, हंटर, पेंसिल, फुलझड़ी, चटर-पटर, जुगनू, फैंसी अनार, बटरफ्लाई, सायरन करने वाली फुलझड़ी, नॉन स्टाप 120 स्काई शॉट्स के अलावा काफी कुछ है।
सेेहत, पर्यावरण और जेब पर भारी पटाखे
पटाखे सेहत,पर्यावरण से लेकर जेब सभी पर भारी पड़ते हैं। इनकी वजह से पर्यावरण को नुकसान तो होता है पटाखों के प्रदूषण से हर तरह के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। दमा, ब्रान्काइटिस, हार्ट, हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए अधिक खतरा होता है।
‘नॉइज पॉल्यूशन’ हाई ब्लडप्रेशर और हार्ट के मरीजों को अस्पताल पहुंचा सकता है। हाई रिस्क वाले मरीजों को 100 डेसिबल से अधिक आवाज वाले पटाखों से अटैक भी आ सकता है। लगातार पटाखों के शोर से ब्लडप्रेशर भी हाई हो जाता है।
डॉक्टरों के मुताबिक दिवाली के बाद शहर में दिल और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों में 20 से 25 फीसदी का इजाफा पिछले पांच वर्षों से देखने में आ रहा है। कार्डियोलॉजिस्ट डा. एस के वर्मा के अनुसार पटाखों की लगातार आवाज की वजह से ब्लड प्रेशर के मरीजों का प्रेशर बढ़ने का खतरा रहता है। इसके साथ ही जो मरीज हाई रिस्क में या एन्जाइना के मरीज हैं, उनको अटैक भी आ सकता है।
पटाखों के धुएं से क्या हैं खतरे
ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. संदीप पवार ने बताया कि 60 डेसीबल से अधिक आवाज बहरा कर सकती है। गले और नाक के लिए भी खतरा है। पटाखों के धुंए से निकल सल्फर और नाइट्रोजन फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं।
अस्थमा केरोगियों केलिए ये खतरा है। बच्चों में क्रॉनिक ब्रान्काईटिस का सबसे बड़ा कारण पटाखे ही हैं। धुएं से एलर्जी आपके लिए घातक हो सकती है। एमएमजी के चेस्ट फिजिशियन डा. जेके त्यागी ने बताया कि दिवाली के बाद सबसे ज्यादा दमे और अस्थमा के रोगी बढ़ जाते हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
- पटाखे बिना आवाज और कम धुएं वाले हों।
- खुली जगह में ही पटाखे छोड़े।
- पानी की पूर्व में पर्याप्त व्यवस्था हो।
- कानों में ईयर बड्स या रुई लगाकर रखें।
- बड़ों की मौजूदगी में ही बच्चों को पटाखे जलाने दें।
इनसेट: दुर्घटना हो तो ये करें
- कपड़ों में आग लगे तो कंबल या मोटे कपड़े से ढक कर आग बुझाएं
- जलने पर लगातार पानी डालें ।
- आंखों में पार्टिकल्स गिर जाए तो उसे मसले नहीं
- आंखों को लगातार ठंडे पानी से धोएं
- हाथ या पैर की उंगलियां जले तो उन्हें जुड़ने नहीं दें।
- जली जगह पर पट्टी नहीं बांधे, पानी में भिगोकर रुई रखें।