संशोधित..... माई सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। इस बार चतुर्मास पौने पांच महीने का होगा। आम तौर पर चातुर्मास चार महीने का ही होता है। लेकिन इस बार लीप ईयर और अधिकमास के चलते चातुर्मास चार महीने के स्थान पर पौने पांच महीने का होगा। इस बार दो अश्विन मास होंगे। पंडित दुली दत्त कौशिक ने बताया कि इस बार चातुर्मास एक जुलाई से प्रारंभ हो गया है। इस बार यह चातुर्मास चार की जगह पौने पांच महीने का होगा। इसके साथ ही इस चातुर्मास को खास भी माना जा रहा है। इसका कारण है लीप ईयर और अधिमास का एक साथ संयोग बनना। ........................................ चातुर्मास में सभी प्रकार के मांगलिक कार्य स्थगित कर दिए जाते है। देवशयनी एकादशी के बाद चार माह के लिए देव सो जाते हैं इसलिए इस दौरान सभी मांगलिक कार्य बंद होते हैं। वैसे तो चार माह के हिसाब से अक्टूबर माह में चातुर्मास समाप्त होता लेकिन अब 24 नवंबर को समाप्त हो रहा है। अधिकमास 18 सितंबर से लेकर 16 अक्टूबर तक रहेगा। पितृ पक्ष 17 सितंबर को समाप्त होगा। .............................. ज्योतिषाचार्या डॉ सोनिका जैन ने बताया कि चातुर्मास के समय में श्री हरि विष्णु योगनिद्रा में लीन रहते हैं इसलिए किसी भी शुभ कार्य को करना मना रहता है। इसी अवधि में ही आषाढ़ के महीने में भगवान विष्णु ने वामन रूप में अवतार लिया था और राजा बलि से तीन पग में सारी सृष्टी दान में ले ली थी। वहीं, उन्होंने राजा बलि को उसके पाताल लोक की रक्षा करने का वचन दिया था। यही नहीं, श्री हरि अपने समस्त स्वरूपों से राजा बलि के राज्य की पहरेदारी किया करते हैं और इस अवस्था में कहा जाता है कि भगवान विष्णु निद्रा में चले जाते हैं। उन्होंने बताया कि चातुर्मास का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी ये चार माह खानपान में अत्यंत सावधानी बरतने के होते हैं। ये चार माह बारिश के होते हैं। इस समय हवा में नमी काफी बढ़ जाती है जिसके कारण बैक्टीरिया, कीड़े, जीव जंतु आदि बड़ी संख्या में पनपते हैं। सब्जियों में, जल में बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। खासकर पत्तेदार सब्जियों में कीड़े आदि ज्यादा लग जाते हैं। इस लिहाज से इन चार माह में पत्तेदार सब्जियां आदि खाने की मनाही रहती है। इस दौरान शरीर की पाचनशक्ति भी कमजोर हो जाती है। इसलिए संतुलित और हल्का, सुपाच्य भोजन करने की सलाह दी जाती है।