साहिबाबाद। जिला प्रशासन ने एशिया की सबसे बड़ी विधानसभा में मतदाताओं को जागरूक करने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए और जागरूकता रैली भी निकाली। सोसायटियों में स्वयं सीडीओ ने पहुंचकर लोगों को मतदान के प्रति जागरूक किया और संकल्प दिलाया, बावजूद इसके सुबह से ही साहिबाबाद के बूथों पर मतदाताओं का रूझान कम रहा।
वर्ष 2014 की लोकसभा चुनाव में 49.57 प्रतिशत वोट पड़ा था। वर्ष 2019 की चुनाव में इजाफा हुआ और साहिबाबाद विधानसभा में 52.33 प्रतिशत रहा था। वहीं इस बार शाम पांच बजे तक साहिबाबाद विधानसभा का वोट प्रतिशत 42.84 रहा जोकि सबसे कम हैं। यहां 2022 की विधानसभा में भी 47.33 प्रतिशत वोट पड़ा था। मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए इस बार जिला प्रशासन ने लोगों के घर से बूथ तक की दूरी भी सोसायटियों में मतदान केंद्र बनाकर कम कर दी थी। बावजूद इसके लोग घर से नहीं निकले, हालांकि जहां सोसायटियों में बूथ बनाए गए वहां 50 फीसदी से अधिक वोट पड़ा लेकिन वैशाली के मिलिंद एकेडमी स्कूल, वसुंधरा के सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल, वसुंधरा के स्टेपिंग स्टोन स्कूल, शालीमार गार्डन के ग्रीन वैली, दशमेश पब्लिक स्कूल, कोणार्क पब्लिक स्कूल, अर्थला स्थित कैलाशवती इंटर कालेज मतदान केंद्र पर पर लोगों की लाइन कभी बन ही नहीं सकी। यहां दोपहर के समय कई बूथों पर आधा-आधा घंटा तक कोई मतदाता नहीं पहुंचा।
इनसेट
वोट प्रतिशत कम होने के कई रहे कारण
- साहिबाबाद विधानसभा का शहरी इलाका नौकरीपेशा है। यहां 80 फीसदी आबादी दिल्ली, गुड़गांव और फरीदाबाद में प्राइवेट जॉब करती है। इसलिए सभी को वोट डालकर ऑफिस जाने की जल्दी थी। इसी वजह से 11 बजे तक मतदान केंद्रों पर लाइन नजर आई। उसके बाद कमोबेश ज्यादा वोटर नहीं नजर आए।
- लोगों के घरों तक मतदाता पर्ची नहीं पहुंची, लोगों को सुबह ऑफिस जाने की जल्दी थी तो लोग अपना बूथ खोजने के झंझट से बचे।
- तीनों प्रमुख दल के प्रत्याशी टीएचए के इलाके में नहीं पहुंचे वसुंधरा, वैशाली और इंदिरापुरम जैसे इलाके में कोई वीवीआईपी प्रचारक भी नहीं पहुंचा। इसकी वजह से लोगों में नाराजगी दिखी।
- इस बार बहुत से मतदान केंद्र जो पहले बनते थे नहीं बने, इसकी जानकारी लोगों को नहीं थी। वसुंधरा का वनस्थली और आधारशिला ग्लोबल स्कूल इस बार बूथ नहीं बना था। यहां लोग आकर लौटे, वहीं कई मतदान केंद्रों के वोट दूसरे केंद्र पर विस्थापित किए गए थे जो लोगों को बाद में पता चला।