गाजियाबाद। नगर निगम की 1702 दुकानों का किराया बढ़ाने का मामला एक बार फिर तूल पकड़ता नजर आ रहा है। मामले में नगर निगम और व्यापारियों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। हालाकि, नगर निगम ने किराये में आंशिक राहत देने के संकेत दिए हैं लेकिन व्यापारी प्रस्तावित दरों पर सहमत नहीं है। व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने इस मामले को प्रभारी मंत्री असीम अरुण के समक्ष भी उठाया है।
नगर निगम बोर्ड की नौ जनवरी को हुई बैठक में 1702 दुकानों का किराया बढ़ाने पर चर्चा के बाद प्रस्ताव पास कर दिया गया था। पार्षदों का तर्क था कि निगम से दुकानें आवंटित कराकर व्यापारी नाममात्र किराया दे रहे हैं और उन्हीं दुकानों से मोटी आमदनी कर रहे हैं। निगम के चार जोन में करीब 30 बाजारों की दुकानों के किराये में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को बोर्ड ने मंजूर कर लिया था। नई दरों के अनुसार किराये में चार से 18 हजार रुपये तक का इजाफा होना है। हालाकि, इस प्रस्ताव के विरोध में व्यापारियों ने मोर्चा खोलते हुए धरना-प्रदर्शन और बाजार बंद किया था।
इसके बाद मामले के समाधान के लिए पांच अधिकारियों और व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की संयुक्त कमेटी बनाई गई थी। हाल में नगर आयुक्त से मिले व्यापारियों ने प्रस्तावित किराये में कमी की मांग दोहराई लेकिन नगर आयुक्त ने स्पष्ट कर दिया है कि किराये की दरों में आंशिक कमी के बारे में विचार किया जा सकता है। नगर आयुक्त ने व्यापारियों के पाले में ही गेंद डाल दी है। जल्द ही एक बार फिर निगम अधिकारियों और व्यापारियों के बीच बैठक होगी। इस बीच व्यापारियों ने किराया बढ़ोतरी का मामला प्रभारी मंत्री असीम अरुण के समक्ष भी उठाया है।
व्यापारियों की मांग
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के युवा कोषाध्यक्ष राजू छाबड़ा ने बताया कि नगर निगम का प्रस्तावित किराया काफी ज्यादा है। निगम ने 1997 में किराया रिवाइज किया था। प्रत्येक पांच वर्ष के अंतराल पर 12 प्रतिशत किराया बढ़ाकर या मौजूदा किराये को दोगुना करने पर सहमति बन सकती है लेकिन जो दरें निर्धारित हैं उससे तो दुकानदारों पर कई गुना ज्यादा भार बढ़ जाएगा। जल्द ही निगम अधिकारियों से मिलकर स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
नगर निगम का तर्क
नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने स्पष्ट किया है कि किराया आंशिक रूप से कम करने पर विचार हो सकता है। मसलन सात हजार किराया है तो उसे छह या साढ़े छह हजार किया जा सकता है लेकिन प्रस्तावित दरों को दुकानदारों की मांग के अनुसार कम कर पाना संभव नहीं है। व्यापारी इस सुझाव से सहमत हैं तो प्रस्ताव को नगर निगम बोर्ड में दोबारा से रखा जा सकता है। दुकानदारों की जायज मांग को ही माना जा सकता है।
हर बाजार का अलग किराया तय
नगर निगम बोर्ड से पास प्रस्ताव में हर बाजार में किराये की दरें अलग-अलग तय की गई हैं। मसलन, सिटी जोन की रामानुज दयाल मार्केट में 7000, मेरठ रोड इंडस्ट्रियल एरिया में 4000, नवयुग मार्केट मिनी दुकान में 6000, नेहरूनगर में 8000, न्यू मार्केट पुरानी तहसील और गोल मार्केट में 6000 व 12000, मोहननगर जोन के तहत नरेंद्र मोहन अस्पताल के पास 6000, अर्थला में 5000, लाजपतनगर थाना साहिबाबाद 6000, विजयनगर जोन के तहत डी ब्लॅक में 6000, कविनगर जोन में अर्धनिर्मित रेलवे के सामने 6500, कविनगर जोनल कार्यालय के सामने 18000 रुपये प्रति माह किराया तय किया गया है।