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नहीं बचाया पानी तो मुश्किल होगी जिंदगानी

Tue, 12 Apr 2016 01:11 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
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जल - फोटो : अमर उजाला
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भूजल दोहन होने और जल संचय कम होने के कारण साल दर साल वाटर लेबल गिरता जा रहा है। ज्यादातर हिस्सों में उथले नल और नलकूप बेकार हो गए हैं। साल दर साल गहरे होते भूजल स्तर से जिले की हाहत बुंदेलखंड जैसी होने का है।
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इसकेसाथ ही भूजल स्तर में मिलाए जा रहे रसायनों के कारण यह जहरीला होता जा रहा है। इससे ज्यादातर हिस्सों में पानी पीने योग्य नहीं है। इसे पीने से गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। चार में से तीन ब्लाक को डार्क जोन घोषित कर यहां भूजल दोहन पर रोक लगाने के आदेश दिए गए हैं। मगर अफसरों की लापरवाही से इस पर रोक नहीं लगी है।

तीन साल में स्थिति: जनपद में तीन साल में भूजल स्तर में 30 फीट तक की कमी हुई है। यह बेहद खतरनाक स्थिति है। इससे पहले हर साल तीन से पांच फीट तक की गिरावट आती थी। भूजल स्तर में इस गिरावट पर एनजीटी और सामाजिक संगठन चिंता व्यक्त कर चुके हैं।
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यह रहे कारण: भूजल स्तर में तेजी से आ रही गिरावट का मुख्य कारण वर्षा में कमी को माना जा रहा है। पेड़ों की कमी और कंक्रीट के जंगलों के चलते यहां 10 साल में बारिश में 40 फीसदी तक गिरावट आ चुकी है। इसके साथ ही जल संचय की स्थिति भी गड़बड़ा गई है। सड़कों के किनारों, नालों और पार्कों तक को पक्का कर दिया गया है। इसको लेकर एनजीटी की टीम भी शहर का दौरा कर नाराजगी जता चुकी है।

कागजी रहे प्रयास: अधिकारियों ने डार्क जोन क्षेत्रों में नलकूप कनेक्शन बंद करने, सबमर्सिबल कनेक्शन पर रोक लगाने, जलसंचय के लिए सड़कों के किनारों को कच्चा रखने, पेड़ लगवाने और तालाबों को कब्जा मुक्त कराकर बारिश का जल संचय कराने के प्रयास किए। इनमें से ज्यादातर उपाय फाइलों में ही सिमटकर रह गए।

नहीं रुका अवैध दोहन: स्लाटर हाउस, बिल्डर, कंपनियां और निजी क्षेत्र में बड़े स्तर पर भूजल दोहन किया जा रहा है। एनजीटी ने पांच फैक्ट्रियों को नोटिस भी जारी किया है। इसके बावजूद भूजल दोहन पर रोक नहीं लग पा रही है।

जनपद में ग्राउंड वाटर की स्थिति-
भोजपुर ब्लाक- आबादी करीब 6.5 लाख, ग्राउंड वाटर लेबल- 110 फीट (2016) , 98 फीट (2014) और 90 फीट (2013)  

रजापुर ब्लाक- आबादी करीब आठ लाख, ग्राउंड वाटर लेबल - 118 फीट (2016), 110 फीट (2014), और 100 फीट (2013)
लोनी ब्लाक-  आबादी करीब 10 लाख, ग्राउंड वाटर लेबल- 116 फीट (2016), 110 फीट (2014) और 95 फीट (2013)

दूषित हो रहा ग्राउंड वाटर
अफसरों की लापरवाही से भूजल का स्तर गिरने केसाथ ही यह दूषित भी होता जा रहा है। स्लाटर हाउस, केमिकल फैक्ट्रियां, लोहे की फैक्ट्रियां दवा और केमिकल की कंपनिया , कपड़ा और जींस रंगाई मिले भूजल में रसायन मिला रही हैं। इन पर रोक लगाने के उपाय कारगर नहीं हो सके हैं।

जनपदवार डार्कजोन -
1. गाजियाबाद के चार में से तीन विकास खंड डार्क जोन में आ गए हैं। भोजपुर, रजापुर और लोनी विकास खंड क्षेत्रों में भूजल स्तर खतरनाक स्तर तक गिर गया है। सदर ब्लाक में भी भूजल स्तर लगातार गिर रहा है।
2. बुलंदशहर- डार्क जोन- गुलावठी और सिकंदराबाद ब्लाक।
                 - क्रिटिकल जोन - बीबीनगर, खुर्जा, शिकारपुर और खानपुर ब्लाक।
                 - सेमी क्रिटिकल जोन- अगौता, लखावटी, पहासू और ऊंचागांव ब्लाक।
3. हापुड़- डार्क जोन- गढमुक्तेश्वर, हापुड़ और सिंभावली ब्लाक।
4. गौतमबुद्धनगर- बिसरख और जेवर ब्लाक।
5. बागपत- डार्क जोन- बिनौली और पिलाना ब्लाक।
                  - क्रिटीकल जोन- बागपत, बडौत, छपरौली और खेकड़ा ब्लाक।
6. मेरठ-    डार्क जोन- रजपुरा ब्लाक।
               - क्रिटिकल जोन- खरखौदा, माछरा, मेरठ और परीक्षितगढ़ ब्लाक।
               - सेमी क्रिटिकल जोन- दौराला और हस्तिनापुर ब्लाक।


दूषित  पानी से नुकसान-
स्वास्थ्य विशेषज्ञ डा. जीवी सिंह के अनुसार दूषित पेयजल से लोगों मे कैंसर, किडनी और लीवर रोग, त्वचा रोग और आंतों की गंभीर बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। पेयजल से होने वाली बीमारियों से बचने के लिए पानी की शुद्धता जरूरी है।

आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी बचाएं  
 एनसीआर सहित मेरठ मंडल में ग्राउंड वाटर साल दर साल गिरता जा रहा है। वाटर रिचार्ज को जारी की गई योजनाएं अंजाम तक नहीं पहुंच रही हैं। सरकारी एजेंसियों के साथ ही सामाजिक संगठनों और प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक होना होगा। जल दोहन रोककर और जल संचय बढ़ाकर भूजल स्तर को गिरने से बचाया जा सकता है। आने वाली पीढ़ियों की प्यास बुझाने को पानी बचाने को आगे आना होगा।  
इं. उमेश श्रीवास्तव, विशेषज्ञ भूजल।

विजयनगर-कैलाभट्ठा इलाके का पानी है सबसे प्रदूषित

शहर में दूषित पानी की सप्लाई हो रही है। हालत यह है कि होटल, ढाबा, स्कूल, अस्पताल सभी जगहों से लिए गए पानी के सैंपल जांच में फेल आए हैं। सबसे ज्यादा खराब हालत विजयनगर और कैला भट्ठा इलाके की है। एक साल में इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा नमूने फेल हुए हैं।

एक साल में स्वास्थ्य विभाग ने कुल 3672 सैंपल लिए थे। इनमें से 876 नमूने फेल पाए गए हैं। इनमें अकेले विजयनगर और कैला भट्ठा इलाके के ही 200 से ज्यादा नमूने हैं। विभाग की ओर से इन सभी को नोटिस जारी किया गया है।

ज्यादातर नमूनों में क्लोरिनेशन शून्य और टीडीएस की मात्रा भी अधिक पाई गई है। इसमें स्कूल, बड़े होटल्स, रेस्टोरेंट, ढाबा, अस्पताल सहित कई बड़े संस्थान शामिल हैं। इसी वर्ष मार्च में 14 जगहों के पानी के सैंपल फेल पाए गए थे।

इनमें से चार स्कूल सहित जल निगम परिसर तक से लिए गए पानी के सैंपल जांच में फेल हुए थे। स्कूलों में मानकों से ज्यादा कहीं  515, 655, 710 और 963 तक टीडीएस पाया गया था। जबकि मानक के अनुसार 200-250 तक ही टीडीएस की मात्रा होनी चाहिए।

सीएमओ डॉ. अजेय अग्रवाल ने बताया कि आने वाले मौसम में जल जनित रोगों की समस्याएं सबसे अधिक होंगी इसलिए पानी के सैंपल लेने का विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान की शुरूआत एक-दो दिनों बाद स्कूलों से शुरू की जाएगी।

इन इलाकों से फेल मिले हैं पानी के नमूने:
विजयनगर, कैला भट्टा, मालीवाड़ा, सेवानगर, दौलतपुरा, नंदग्राम, साहिबाबाद, अर्थला, संजय कालोनी, पसौंडा, गगन विहार।

कई स्थानों के हैंडपंप का पानी जहरीला

पानी के सैंपल की जांच में क्लोरिनेशन की कमी और टीडीएस की मात्रा अधिक तो पाई ही गई है कई स्थानों के हैंडपंप के पानी के नमूने जहरीले भी पाए गए हैं। इनमें महिला अस्पताल के हैंडपंप सहित मुरादनगर के सैंतली गांव के हैंडपंप का पानी जहरीला पाया गया गया था।

इनके पानी सेवन से कई लोग हेपेटाइटिस जैसी खतरनाक बीमारी के शिकार हो गए थे। इनमें से कई की मौत भी हो गई थी। इसके अलावा लोहियानगर के भी कई स्थानों के हैंडपंप के पानी के जहरीला मिलने के बाद इन्हें बंद कर दिया गया है।
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