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Ghaziabad News: गिरधर बिष्ट की जिंदा वापसी पर हत्या के आरोप में नामजद तीनों भाई घर लौटे

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कौशांबी। वैशाली सेक्टर पांच स्थित कल्पना अपार्टमेंट निवासी गिरधर सिंह बिष्ट की हत्या के आरोप में नामजद शैलेष, सुनील और धर्मेंद्र तीनों घर लौट आए हैं। 25 जून को गिरधर के घर लौटने की सूचना पर वह लौट आए। इन 13 दिनों में जहां तीनों भाइयों ने परिवार से बात तक नहीं की, वहीं उनकी पत्नियों और बच्चों को तानों का सामना करना पड़ा। बच्चों के मन में अब तक पिता की गिरफ्तारी का डर बना हुआ है। यही वजह रही कि शुक्रवार को 13 दिन छिपने के बाद घर लौटे पिता को बच्चों ने परिसर से बाहर नहीं निकलने दिया। घर लौटे शैलेष ने बताया कि 13 जून को जब थाने पर गिरधर के परिवार व अन्य लोगों ने हंगामा किया तब निर्दोष होने के बावजूद पुलिस ने उन्हें दुकान से हिरासत में ले लिया गया। पहले वैशाली सेक्टर-4 स्थित चौकी ले गए और 14 जून की रात यूपी गेट चौकी पर 15 जून की देर रात तक रखा। इस दौरान मसूरी में दर्ज हुए हत्या के मामले की जांच कर रहे उप निरीक्षक ने जांच किए बिना ही उनको दोषी ठहरा दिया। 15 जून की देर रात करीब एक बजे रिश्तेदार की जमानत पर पुलिस ने उन्हें छोड़ा दिया। बृहस्पतिवार को जब गिरधर जिंदा लौटा तो उनकी भी घर वापसी हो पाई।
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पापा बाहर मत जाना..पुलिस गिरफ्तार कर लेगी
13 दिन बाद रात के अंधेरे में जब पिता को बच्चों ने घर के दरवाजे पर देखा तब रोते हुए लिपट गए। रात भर बच्चों ने पिता का साथ नहीं छोड़ा। 13 दिन से दुकान बंद थी, पूरा काम ठप हो चुका था। घर का लोन, बच्चों के स्कूल व ट्यूशन की फीस व अन्य घरेलू खर्चों की चिंता सता रही थी। शुक्रवार को जब तीनों भाई दुकान पर जाने लगे तो तो बच्चों ने उन्हें रोक दिया। कहा कि पापा घर से बाहर मत निकलना पुलिस फिर पकड़ लेगी। आप बाहर जाओगे तो हम फिर अकेले हो जाएंगे।


गिरधर नहीं लौटता तो परिवार को छोड़नी पड़ती सोसायटी
सुनील ने बताया कि गिरधर पक्ष ने हंगामा कर उन्हें हत्यारोपी घोषित कर दिया और प्राथमिकी भी दर्ज कराई। उन्हीं लोगों ने एक व्हाटसएप ग्रुप भी बना रखा है। उसमें उनके परिवार को सोसायटी से बाहर करने की साजिश बना ली थी। शैलेष ने बताया कि अच्छा हुआ घटना का जल्द खुलासा हो गया, नहीं तो बच्चों को और क्या-क्या सुनना व सहन करना पड़ता। उन्होंने बताया कि 16 मई की शाम गिरधर ने उनकी दुकान पर पहुंचकर पीछे से सिर में हथौड़ी मारी थी, गनीमत रही कि उनकी जान बच गई अगर उस दिन कोई अनहोनी हो जाती तब उनके परिवार का क्या होता। कौन इसका जिम्मेदार होता।
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प्रसाद कम देने पर पुजारी को पीटा, कई से की मारपीट
सोसायटी और उसके आसपास लोगों से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि गिरधर के व्यवहार से लोग सिर्फ परेशान ही नहीं बल्कि दहशत में थे। वह प्रॉपर्टी डीलर के कार्यालय पर बैठता था। कुछ समय पहले प्रसाद कम देने पर मंदिर के पुजारी को बुरी तरह पीटा था। इसके अलावा पार्क में बुजुर्गों पर हमला करना भी हर दिन की बात थी।

एसीपी मसूरी अजय सिंह का कहना है कि गिरधर के बयान दर्ज कराए गए हैं, अभी कुछ सवालों के जवाब नहीं मिल पाए हैं। उनके लिए गिरधर की मां और बहन के बयान भी दर्ज कराए जाएंगे। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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