महामाया स्टेडियम में दो वर्षों से स्वीमिंग पूल बंद पड़ा है। इस वजह से तैराकी के खिलाड़ियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खिलाड़ियों को हजारों रुपये खर्च कर निजी अकादमी में तैराकी करनी पड़ रही है या तो कई खिलाड़ियों ने अपने पसंदीदा खेल को ही बदल दिया है।
वर्तमान में महामाया स्टेडियम में मैदान समेत अन्य चीजों के जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है। इसके लिए शासन से विभाग को 16 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया है। निर्माण कार्य करीब दो वर्षों से जारी है। इस वजह से स्टेडियम के मैदान में अव्यवस्थाओं का अंबार है। मैदान में चारों ओर मलबे के ढेर लगे हैं। यह ढेर फुटबॉल कोर्ट पर लगे हैं। इस वजह से फुटबॉल खेलने आने वालों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
स्वीमिंग पूल दो वर्षों से जीर्णोद्धार का इंतजार कर रहा है, लेकिन विभाग के ढिलमुल रवैये और कार्यदायी संस्था की कछुआ चाल से निर्माण कार्य होने की वजह से पूल का निर्माण कार्य 60 फीसदी भी नहीं पूरा हो पाया है। स्टेडियम में तीन पूलों की सुविधाएं हैं। इसमें लर्निंग, डाइविंग और 50 मीटर का पूल बना है, जोकि वर्तमान में जर्जर पड़ा है। इससे निकाले गए मलबे को स्टेडियम के मैदान में फेंका गया है। इन अव्यवस्थाओं की वजह से कई खिलाड़ियाें का अभ्यास भी ठप पड़ा है। संपन्न खिलाड़ी तो निजी अकादमियों का सहारा अभ्यास जारी रखने के लिए ले रहे हैं। साथ ही अब उन्हीं अकादमी के लिए विभिन्न स्तरों पर होने वाली प्रतियोगिताओं में भी प्रतिभाग कर रहे हैं। स्थिति यह है कि पूल अब तक स्वीमिंग पूल में प्रशिक्षण देने के लिए एक बार भी कोच की नियुक्ति नहीं हुई है। पूर्व में भी स्टेडियम का स्वीमिंग पूल एक लाइफ सेवर के सहारे ही संचालित किया जाता रहा है। जीर्णोद्धार कार्य शुरू होनेे के बाद पूल में तैनात लाइफ सेवर का भी मुजफ्फरनगर जिले में तबादला हो गया और उसके बाद से स्टेडियम में न तो खिलाड़ियों के लिए कोच है और न ही यहां पर कोई लाइफ सेवर की तैनाती की गई है। लाइफ सेवक का पद यहां पर करीब एक साल से रिक्त है।
वर्जन-
शासन से आए निर्देशों के अनुपालन में निर्माण कार्य चल रहा है
स्टेडियम में चल रहे निर्माण कार्य शासन के आदेशानुसार कराए जा रहे हैं। एक बार कार्य पूरा हो जाए। इसके बाद समस्या दूर हो जाएगी। अभिषक कुमार्, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी