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Ghaziabad News: सजा मंच, जगमगाने को तैयार थीं लाइटें... मगर मातम ने रोक दी 38 साल पुरानी रामलीला

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साहिबाबाद। लाजपत नगर में इस बार न रावण का पुतला दहन होगा, न रामलीला के मंच से जय श्रीराम के जयकारे गूंजेंगे और न ही मेले की रौनक नजर आएगी। 38 साल से लगातार चली आ रही रामलीला की परंपरा इस बार पहली बार थम गई है। सामुदायिक भवन में हुए पांच धमाकों में अब तक तीन लोगों की मौत के बाद रामलीला समिति ने आयोजन नहीं करने का फैसला लिया है। जिस मंच पर कुछ ही दिनों में रामायण के प्रसंगों का मंचन होना था, वह तैयार होकर भी सूना रह जाएगा। रोशनी और साउंड की व्यवस्था पूरी हो चुकी थी लेकिन हादसे के बाद माहौल ऐसा बदला कि उत्सव की तैयारियों पर शोक भारी पड़ गया।



लाजपत नगर की रामलीला स्थानीय लोगों के लिए महज धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही सामाजिक परंपरा का हिस्सा रही है। हर साल रामलीला देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटती थी। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए यह आयोजन खास रहता था। इस बार भी समिति की ओर से तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई थीं। मंच सज चुका था और लाइटिंग व साउंड सिस्टम भी तैयार था। कलाकारों के अभिनय और रामलीला के शुभारंभ का इंतजार था लेकिन सामुदायिक भवन में हुए धमाकों ने पूरे माहौल को गमगीन कर दिया।
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हादसे में तीन लोगों की मौत के बाद समिति ने आयोजन को लेकर दोबारा विचार किया। आखिरकार शनिवार शाम आयोजित शोकसभा में मृतकों को श्रद्धांजलि देने के बाद इस वर्ष रामलीला नहीं कराने का निर्णय लिया गया। समिति के अध्यक्ष विक्रम सिंह बैसला ने बताया कि उनके लिए यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि आयोजन से लोगों की धार्मिक आस्था के साथ वर्षों की यादें भी जुड़ी हुई हैं।



मृतकों के परिवारों का दुख सबसे बड़ा



रामलीला समिति के अध्यक्ष के मुताबिक, हादसे में हुई जनहानि के बाद सामान्य उत्सवी माहौल में आयोजन करना उचित नहीं लगा। समिति ने मृतकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए इस वर्ष रामलीला स्थगित करने का निर्णय लिया। 38 वर्षों से चली आ रही परंपरा में पहली बार ऐसा होगा, जब लाजपत नगर में रामलीला का मंचन नहीं किया जाएगा। वहीं, लाजपत नगर में इस बार रामलीला का मंच भले ही तैयार होकर खाली रह जाए लेकिन उसके पीछे की वजह ने पूरे क्षेत्र को गहरे दुख में डाल दिया है। लोगों के बीच रामायण के संवादों की जगह हादसे में जान गंवाने वालों की यादें और उनके परिवारों के प्रति संवेदनाएं रहेंगी।
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दुकानदारों और झूले वालों पर भी पड़ेगी मार



रामलीला के साथ लगने वाला मेला कई छोटे कारोबारियों की कमाई का जरिया भी होता है। झूले लगाने वाले, खिलौने बेचने और अन्य दुकानदार हर साल इस आयोजन से अच्छी आमदनी की उम्मीद रखते हैं। इस बार आयोजन रद होने से इन कारोबारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। कई लोगों ने मेले को ध्यान में रखकर अपनी तैयारियां की होंगी लेकिन अब उनके सामने कमाई का अवसर खत्म होने की आशंका है।
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