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Ghaziabad News: जंग-ए-आजादी का सिपाही बना था गाजियाबाद का पहला सांसद

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धीरेंद्र मिश्र
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गाजियाबाद। गाजियाबाद के पहले सांसद कृष्ण चंद शर्मा जंग-ए-आजादी के सिपाही थे। उनकी गिनती कांग्रेस के बड़े नेताओं में होती थी। उन्हें देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू और पांचवें प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का करीबी माना जाता था। इस सीट पर हुए 1957 में हुए पहले ही चुनाव में उन्होंने कांग्रेस की विजय पताका फहरा दी थी। सहारनपुर में जन्मे और मेरठ में पढ़े केसी शर्मा की छवि समाज सुधारक की थी। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के छूआछूत के विरोध में चलाए गए आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था।
गाजियाबाद उस समय जिला नहीं, बल्कि मेरठ का एक तहसील था। लोकसभा क्षेत्र भी गाजियाबाद के नहीं, हापुड़ के नाम से था। 1952 के चुनाव में गाजियाबाद के लोगों ने मेरठ लोकसभा क्षेत्र का सांसद चुनने के लिए वोट दिए थे। 1957 में ही हापुड़ सीट बनी, जिसे आमतौर पर हापुड़-गाजियाबाद लोकसभा क्षेत्र कहा जाता था। यह चुनाव बड़ा ही दिलचस्प था। सिर्फ दो ही लोग चुनाव मैदान में उतरे थे।
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कांग्रेस से कृष्ण चंद शर्मा और भारतीय जनसंघ से सुखदेव शास्त्री के बीच आमने सामने का मुकाबला था। इसमें कृष्ण चंद शर्मा को 67 फीसदी से ज्यादा वोट मिले जबकि सुखदेव शास्त्री को 32.65 फीसदी। कृष्ण चंद शर्मा ने बड़ी जीत दर्ज की। हालांकि, इसके बाद वह इस सीट से चुनाव नहीं लड़े। उन्हें अगले चुनाव में बागपत सीट से उतारा गया। उनको करीब से जानने वाले खरखौंदा विधानसभा सीट से 1985 से 1989 तक कांग्रेस विधायक रहे राजेंद्र शर्मा बताते हैं कि केसी शर्मा बेबाक और काम पसंद व्यक्तित्व के धनी थे। 1957 में जब उन्हें हापुड़-गाजियाबाद से टिकट दिया गया तो उनके चुनाव प्रचार में मेरठ, हापुड़ और सहारनपुर से कार्यकर्ता पहुंचे।


रैली न रोड शो...साइकिल पर होता था प्रचार

सरदार गुरजीत सिंह बताते हैं कि 1957 का चुनाव बड़ी ही सादगी से लड़ा गया था। उस दौर में आज ही तरह शोर शराबा नहीं होता था। न बड़ी रैलियां होती थीं और न ही रोड शो। गाजियाबाद से हापुड़ तक साइकिल और रिकशा से प्रचार किया जाता था। नेताओं का जोर नुक्कड़ सभाओं पर रहता था। इनमें काफी लोग जुटते थे। लोगों में इसी बात की खुशी थी कि वे अपनी सरकार चुन रहे हैं।


शरणार्थियों के लिए बनवाए थे आवास

सांसद केसी शर्मा ने क्षेत्र के लिए कई विकास कार्य कराए। पाकिस्तान से आए शरणार्थियों के लिए पहले विधायक सरदार तेजा सिंह के साथ मिलकर आवासीय व्यवस्था कराई। उद्योगों को बढ़ावा दिया। सरदार गुरजीत सिंह बताते हैं कि गाजियाबाद के लिए 1957 में एक और बड़ा काम हुआ था। लोगों को पहली बार नल से जल मिला था। रमतेराम रोड पर पानी की टंकी बनवाई गई। इससे पुराने शहर में पेयजल सप्लाई शुरू की गई। इसके पहले हर चौक-चौराहों पर कुएं हुआ करते थे।
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पहले सांसद
केसी शर्मा का जन्म 13 सितंबर 1903 को सीडकी गांव, सहारनपुर में हुआ था। मेरठ कॉलेज से कानून में विधि स्नातक की पढ़ाई की।
मेरठ में यूथ लीग के अध्यक्ष (1928-1930) और अस्पृश्यता विरोधी सोसायटी, मेरठ के अध्यक्ष (1930-1932) रहे।
शहर कांग्रेस कमेटी, मेरठ के अध्यक्ष (1931-1937 और 1939-1946), दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव (1932-1936) थे और बाद में इसके उपाध्यक्ष (1936-1938) के रूप में चुने गए।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (1940-1942) के सदस्य भी थे। बाद में उन्हें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (1949-1952) में पदोन्नत किया गया।

कांग्रेस पार्टी के टिकट पर संयुक्त प्रांत से संविधान सभा के लिए चुने गए थे। मुख्य रूप से न्यायपालिका से संबंधित चर्चाओं में योगदान दिया ।



1957 का चुनाव

कुल मतदाता 4,20,441
वोट पड़े 2,44,734
मतदान प्रतिशत 58.21
नतीजा
केसी शर्मा (कांग्रेस) 1, 64, 831

सुखदेव शास्त्री (भारतीय जनसंघ) 79,903
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