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नोट बंदी ने भर दी नगर निगम की झोली

Fri, 25 Nov 2016 01:06 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
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नगर ‌निगम - फोटो : अमर उजाला
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नोट बंदी ने कई सरकारी विभागों की आमदनी का ग्राफ नीचे गिरा दिया है, लेकिन नगर निगम और पावर कारपोरेशन की इस नोट बंदी से बल्ले-बल्ले हो रही है। ऐसे बकाएदार भी अपना संपत्ति कर और बिजली बिल जमा करा रहे हैं, जो पहले आनाकानी कर रहे थे।
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24 नवंबर को 1000-500 के नोटों के चलन का आखिरी दिन माना जा रहा था, ऐसे में सुबह से ही नगर निगम के जोनल कार्यालयों में संपत्ति कर जमा कराने वालों की भीड़ लगी रही। बृहस्पतिवार को निगम में 74.77 लाख रुपये टैक्स जमा हुआ है जबकि सामान्य दिनों में एक दिन की वसूली 10 से 15 लाख रुपये की रहती थी।

नोट बंदी के बाद नगर निगमों में 1000-500 के नोटों को स्वीकार किया जा रहा था। इसके चलते 9 नवंबर से ही निगम के सभी जोनल कार्यालयों में संपत्ति कर जमा करने वालों की भीड़ उमड़ रही थी।
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केंद्र सरकार के 24 नवंबर तक टैक्स के रूप में 1000-500 के नोट स्वीकार किए जाने की घोषणा से बृहस्पतिवार को टैक्स कलेक्शन अन्य दिनों से ज्यादा रहा। बृहस्पतिवार को सिटी जोन में 16.78 लाख रुपये और पांचों जोन में कुल 74.77 लाख रुपये संपत्ति कर के रूप में जमा हुए।

अपर नगर आयुक्त डीके सिन्हा ने बताया कि 9 नवंबर से 24 नवंबर तक 5.82 करोड़ रुपया जमा हुआ। बीते साल 9 नवंबर से 24 नवंबर के बीच 1.79 करोड़ रुपया टैक्स के रूप में जमा हुआ था।

यह स्थिति तब है जब इस साल 20 फीसदी छूट लेने के चक्कर में अधिकांश भवन मालिक सितंबर-अक्तूबर में ही अपना टैक्स जमा करा चुके। अपर नगर आयुक्त का कहना है कि नोट बंदी के बाद ऐसे लोग भी टैक्स जमा कर रहे हैं, जिन पर बीते साल का भी बकाया था।

शासन ने मांगा नोट बंदी के दौरान कलेक्शन का ब्योरा
नोट बंदी के बाद से गाजियाबाद में ही नहीं प्रदेश भर के नगर निकायों की आमदनी बढ़ी है। नगर विकास विभाग ने नगर निगम से 9 नवंबर के बाद से टैक्स कलेक्शन का ब्योरा मांगा है। प्रतिदिन होने वाली वसूली की रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है।
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