- सड़कों पर बेरोकटोक दौड़ रहे निगम के अनफिट वाहन, कई का पंजीकरण भी हो चुका निरस्त
- ऐसे ही एक वाहन ने एक दिसंबर को बुलंदशहर में तैनात उपनिरीक्षक के इकलौते बेटे को कुचला
अनिल त्यागी
गाजियाबाद। नगर निगम के कई वाहन न सिर्फ अनफिट हैं, बल्कि बड़ी संख्या में वाहनों का पंजीकरण भी आरटीओ से निरस्त हो चुका है। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर ये वाहन बेरोकटोक सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इसी एक दिसंबर को शास्त्रीनगर में बाइक सवार शिवम व उसके दोस्त को निगम के पानी के टैंकर (यूपी-14बीटी-5189) ने कुचला था। उसका पंजीकरण भी अक्तूबर 2025 में खत्म हो चुका है।
नगर निगम ने यह टैंकर मार्च 2010 में खरीदा था। दो माह बाद मई में इसका आरटीओ में पंजीकरण कराया गया। उस दौर (यूपी-14बीटी सीरीज) के सभी वाहनों का पंजीकरण आरटीओ से निरस्त किया जा चुका है। इसकी सूचना वाहन स्वामियों और विभागों को भेज दी गई है। इसमें आरटीओ की ओर से कहा गया है कि इन वाहनों का संचालन तत्काल बंद कर दें। इनका संचालन करना अपराध है।
इतने पुराने वाहन न केवल लोगों की जान के लिए खतरा बन सकते हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी खतरनाक हैं। इसके बावजूद निगम का 15 वर्ष पुराना टैंकर सड़क पर खुलेआम घूम रहा था। न तो पुलिस ने इस वाहन पर कार्रवाई की और न ही आरटीओ प्रवर्तन दलों ने।
नोटिस तक सीमित विभागीय कार्रवाई
वर्तमान में नगर निगम के 163 वाहन अनफिट हैं। इनकी फिटनेस कराने के लिए आरटीओ की ओर से दो बार पत्राचार किया गया, लेकिन निगम ने एक भी वाहन की जांच अब तक नहीं कराई। कई वाहनों की फिटनेस तो दो-तीन साल पहले खत्म हो चुकी है। इसके बावजूद परिवहन विभाग ने पहला नोटिस अक्तूबर 2025 में भेजा।
यह थी घटना
रजापुर गांव निवासी कृष्णपाल सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस में उपनिरीक्षक हैं। इन दिनों उनकी तैनाती बुलंदशहर में है। उनका इकलौता बेटा शिवम अपने दोस्त के साथ बाइक से एक दिसंबर को शास्त्रीनगर गया था। इसी दौरान नगर निगम के पानी के टैंकर ने दोनों को कुचल दिया। इसमें शिवम की मौत हो गई। दोस्त का अब भी उपचार चल रहा है। घटना से नाराज लोगों ने हंगामा भी किया था। दो साल पहले ही शिवम की शादी हुई थी।
नगर निगम के जिस पानी के टैंकर से एक दिसंबर को हादसा होने की बात सामने आई है, उसका पंजीकरण अक्तूबर में निरस्त हो चुका है। जिन वाहनों का पंजीकरण निरस्त होता है, उसकी सूचना विभाग और वाहन स्वामी को भेजी जाती है। इसके अलावा थाने में भी सूचना दी जाती है।अगर इस तरह किसी वाहन का संचालन होता है तो यह अपराध की श्रेणी में आता है। सड़क पर चलता पाए जाने पर हम ऐसे वाहनों को जब्त भी करते हैं।
-अमित राजन राय, एआरटीओ, प्रवर्तन