लोनी। मांडला गांव स्थित श्मशान घाट में एक महिला के खुले आसमान के नीचे हो रहे अंतिम संस्कार के दौरान बरसात आ गई। बरसात के चलते चिता बुझने लगी। परिजनों ने चिता के ऊपर लोहे की टीन डालकर अंतिम संस्कार की क्रिया को पूरा किया। इस घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। दो साल पहले भी इस श्मशान घाट में बरसात के चलते एक चिता की आग बुझी थी।
मांडला गांव की आबादी करीब साढ़े 7 हजार है। इस गांव के पास नहर रोड पर श्मशान घाट है। ग्रामीणों का कहना है कि यह श्मशान घाट करीब 100 वर्ष पुरानी है। इस श्मशान घाट में राम विहार, आदेश नगर, कृष्णा विहार, बृज बिहार समेत आसपास कॉलोनी के लोग अंतिम संस्कार के लिए आते हैं। गांव निवासी आशु कसाना ने बताया कि उनकी चाची ऊषा (45) पत्नी मुकेश कसाना करीब चार सालों से कैंसर की बीमारी से ग्रसित थी। उनका दिल्ली के एम्स अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनके चाचा पीडब्ल्यूडी के जेई हैं। शनिवार को उषा की बीमारी के चलते मौत हो गई। परिवार के लोग ऊषा को लेकर श्मशान घाट पहुंचे। यहां खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार की क्रिया शुरू हुई। परिजनों ने महिला की चिता को आग दी। इस दौरान बरसात शुरू हो गई। चिता में आग लग रही थी।
बरसात का पानी आने पर चिता बुझने लगी। तभी परिवार के लोग बरसात के पानी को रोकने के लिए लोहे की टीन लेकर मौके पर पहुंचे। उन्होंने चिता के ऊपर टीन रखकर अंतिम संस्कार की क्रिया को पूरा किया। आशु ने बताया कि दो साल पहले भी गांव में रहने वाली ओमवती के अंतिम संस्कार के दौरान बरसात आ गई थी। बरसात के चलते चिता बुझ रही थी तभी ग्रामीणों ने लोहे की टीन डालकर अंतिम संस्कार की क्रिया को पूरा किया। उस समय भी इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। ग्रामीणों का कहना है कि इस श्मशान घाट को बनवाने के लिए कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मिल चुके है। जल्द श्मशान घाट बनवाने का आश्वासन भी दिया गया लेकिन अभी भी ग्रामीण खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार किया जा रहा हैं।