संवाद न्यूज एजेंसी
गाजियाबाद। निवाड़ी गांव के निवासी नेपाल सिंह की मौत के मामले में पुलिस की जांच रिपोर्ट पर कोर्ट ने सवाल उठाए हैं। एसीजीएम जसवीर सिंह यादव ने जांच रिपोर्ट को निराधार मानकर पुनः जांच आदेश दिए हैं। इस मामले में पुलिस ने नेपाल सिंह के शव की गर्दन काटकर फोरेंसिक लैब में जांच कराई। इसके बावजूद मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका।
एसीजीएम जसवीर सिंह यादव ने अपने आदेश में कहा कि निवाड़ी पुलिस की रिपोर्ट भ्रामक और झूठी है। इस मामले में आरोपी बताए गए शख्स को तीन दिनों तक थाने में बैठाकर छोड़ दिया गया। सवाल उठाए कि केस डायरी में डॉ. एके विश्कर्मा के बयानों में साफ है कि नेपाल के सिर को रासायनिक परीक्षण के लिए पुलिस को सौंपा गया।
विवेचक ने उल्लेख किया है कि सिर का टुकड़ा मेरठ मेडिकल कॉलेज भेजा गया। मेडिसन एवं विधि विज्ञान की रिपोर्ट में सिर में कोई चोट नहीं पाई गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में अल्कोहल या किसी भी तरह का विष नहीं पाया गया। विवेचक ने नेपाल सिंह की नशे में मृत्यु होना दर्शाया। कोर्ट ने सवाल किया है कि आखिर शव की गर्दन काटकर परीक्षण कराने का क्या उद्देश्य था। जबकि सिटी स्कैन और अन्य जांच सुविधाएं जिले में संचालित हैं।
यह है मामला
नेपाल सिंह निवासी निवाड़ी पर ऊर्जा निगम का 30 हजार रुपये बकाया था। बिजली कर्मचारियों ने किस्तों में 10-10 हजार रुपये जमा करने की बात कही। नेपाल सिंह गांव के व्यक्ति के कोल्हू पर मजदूरी करते थे और संचालक से 10 हजार रुपये लाने की बात कहकर घर से निकले थे। उनका शव पांच जून 2023 को गन्ने के खेत में मिला। उनके परिवार की ओर से इस मामले की शिकायत मानवाधिकार आयोग में भी की गई है।