गाजियाबाद/साहिबाबाद। नए मोटर व्हीकल एक्ट के विरोध में नए साल के पहले दिन वाहन चालकों ने हड़ताल कर दी। रोडवेज की बसों के पहिए थम गए। शहर से लेकर देहात तक आधे से ज्यादा ऑटो भी नहीं चले। ऐसे में ठिठुरन भरी कड़ाके की सर्दी में यात्रियों के लिए बड़ी मुश्किल हो गई। बस स्टेशन से ऑटो के स्टैंड तक यात्री भटकते रहे, लेकिन मायूसी और परेशानी के सिवाय कुछ नहीं मिला। हर तरफ से निराश होकर बड़ी संख्या में लोग रेलवे स्टेशन पहुंचे, लेकिन यहां भी बात नहीं बनी। ट्रेनों में टिकट का इंतजाम नहीं हो पाया।
आठ बजे के आसपास गाजियाबाद बस अड्डे, मुरादनगर, मोदीनगर, दुहाई बस अड्डो पर लोग वाहनों के इंतजार में एकत्र हो गए। जो डग्गामार और ऑटो चल रहे थे, वे भी ओवरलोड थे। कई लोग निजी वाहन चालकों से लिफ्ट लेकर गंतव्य को गए।
यात्री वसीम ने बताया कि हड़ताल की जानकारी नहीं होने से लगभग दो घंटे से ज्यादा मोदीनगर बस स्टैंड पर इंतजार किया। बाद में डग्गामार बस से गाजियाबाद पहुंचा हूं। 50 रुपये किराया वसूला गया। मुरादनगर जाने वाली यात्री कमला ने बताया कि सरकार और चालकों के बीच चल रहे विवाद में यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। एआरएम एनके वर्मा ने बताया कि हड़ताल खत्म कराने के लिए बस चालकों से वार्ता की जा रही है।
रोडवेज बस चालक-परिचालकों की हड़ताल के दौरान जीटी रोड के किनारे ट्रकों को खड़ा करने से अन्य वाहन चालकों को जाम से जूझना पड़ा। राजेंद्र नगर गोल चक्कर, ट्रांसपोर्ट नगर पर घंटो जाम रहा। इससे आवाजाही करने वाले वाहन चालकों के साथ राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
यह है नया कानून
वरिष्ठ अधिवक्ता राजकुमार गुप्ता ने बताया कि कानून में संशोधन होने के बाद अब हिट एंड रन मामले में चालक को अधिकतम 10 साल तक की सजा और सात लाख का जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है। विशेष मामले में हत्या की धारा भी बढ़ाई जा सकती है। पहले इस मामले में दो साल तक की सजा का प्रावधान था। पुलिस के स्तर पर धारा-141 का नोटिस देकर जमानत मिल जाती थी।
जारी रहेग आंदोलन
रोडवेज बस चालक अरविंद कुमार ने बताया कि चालक कम वेतन पर काम करता है। हादसा होने के बाद वहां एकत्र भीड़ हमलावर हो जाती है। इसलिए मौके से भागना चालक की मजबूरी बन जाती है। सरकार ने कानून को कड़ा बनाकर चालकों का मनोबल तोड़ने का काम किया है। जब तक यह कानून वापस नहीं होगा, आंदोलन जारी रहेगा। शीर्ष नेतृत्व के आदेश का इंतजार किया जा रहा है। हड़ताल को बढ़ाने का निर्णय संगठन स्तर पर लिया जाएगा।
ढाई लाख यात्रियों को परेशानी
500 से अधिक बसों का संचालन होता है। कौशांबी बस अड्डे से करीब 400, गाजियाबाद बस अडडे से 55 बसें चलती हैं। रोजाना ढाई से तीन लाख यात्री सफर करते हैं। गाजियाबाद बस अड्डे से 5500 से 6000 यात्रियों की आवाजाही होती है। 30 हजार के आसपास दैनिक यात्री हैं। दो हजार से ज्यादा ऑटो व ई-रिक्शा चलती हैं। जिनमें 20 हजार लोगों की आवाजाही होती है। सोमवार को करीब 100 ऑटो, ई-रिक्शा का संचालन ही हुआ।
रेलवे स्टेशन पर रही भारी भीड़
बस, ऑटो की सुविधा नहीं मिलने का असर गाजियाबाद नए, पुराने, मोदीनगर, मुरादनगर स्टेशन पर देखने को मिला। लोकल ट्रेनों के इंतजार में लोग स्टेशन पर पहुंचे, लेकिन शालीमार को छोड़कर अधिकांश ट्रेनें देरी से चलीं, जिसकी वजह से लोगों को वहां भी कोई राहत नहीं मिल सकी। कई लोग वहां से निराश लौटे और ओला, ऊबर का सहारा लेकर गंतव्य तक पहुंचे।
चालकों ने रोकी बस,उतारीं सवारियां
मसूरी। मसूरी से गुलावठी को जाने वाले रास्ते पर कई डग्गामार और ऑटो में सवारी लेकर जा रही बसों, ऑटो को ट्रक चालकों के समूह ने रोका और उनमें से सवारियों को उतार दिया। एनएन-9 पर भी इसी तरह कई वाहनों को रोका गया जिससे जाम की स्थिति बन गई। यात्रियों ने इसकी सूचना पुलिस को दी तो पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को समझाया और स्थिति को किसी तरह काबू किया।
आज थम सकते हैं 10 हजार ट्रकों के पहिये
हड़ताल के समर्थन में ट्रांसपोर्टर भी उतर गए हैं। रोडवेज बस चालकों के साथ अधिकांश ट्रक चालक भी काम पर नहीं गए। मंगलवार को ट्रक चालकों व ट्रांसपोर्टरों की बैठक लालकुआं के पास पेट्रोल पंप पर होगी। ट्रांसपोर्टर यूनियन गाजियाबाद के अध्यक्ष श्यौदान सिंह गुर्जर ने बताया कि चालकों के साथ ट्रांसपोर्टर कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। सरकार को इस नए कानून को वापस लेना चाहिए। ये मांगें नहीं मानी गई तो जिले में संचालित हो रहे 10 हजार ट्रकों के पहिये थम जाएंगे।