गाजियाबाद। लगातार पांचवें दिन भी शहर की हवा जहरीली बनी रही। हवा की गुणवत्ता इतनी खराब हो गई है कि अब घर के अंदर भी सांस लेना मुश्किल हो रहा है। एमएमजी और संयुक्त जिला अस्पताल की इमरजेंसी में रविवार आए मरीजों 10 फीसदी ऐसे लोग थे जिन्हें घर के अंदर भी सुबह के समय सांस लेने में दिक्कत और खांसी की परेशानी हो रही है। घर से बाहर निकलने वाले लोग आंखों में जलन, बुखार, बेचैनी, घबराहट और थकान की परेशानी से जूझ रहे हैं। जिला एमएमजी अस्पताल में फिर से भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है।
रविवार को अवकाश होने से एमएमजी और जिला संयुक्त अस्पताल की इमरजेंसी में 82 मरीज पहुंचे थे। इनमें 70 मरीजों के गले में दर्द, खराश और आंखों में जलन से परेशान थे। एमएमजी अस्पताल के नेत्र सर्जन डाॅ. नरेंद्र कुमार ने बताया कि कि शनिवार की ओपीडी में 224 मरीज आए थे, उनमें से 90 फीसदी लोगों को प्रदूषण के कारण परेशानी हुई थी।
सीएमएमएस डॉ. मनोज कुमार चतुर्वेदी का कहना है कि मौसम ठंडा होने के कारण हवा भारी हो जाती है, इस कारण से हवा में घुले धूल और धुएं के कण छंट नहीं पाते। प्रदूषण के चलते हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 बढ़ गया है। इस कारण से सबसे ज्यादा आंखों में जलन की समस्या सामने आ रही है।
पहले से दवाई ले रहे मरीज रहें सतर्क
जिला एमएमजी चिकित्सालय के वरिष्ठ परामर्शदाता डाॅ. संतराम वर्मा का कहना है कि डेंगू और मलेरिया के मरीज भी इस मौसम में बढ़े हैं। अभी यह स्थिति 15 से 20 दिन तक बनी रह सकती है। प्रदूषण से मुश्किलें और बढ़ गईं। ऐसे मौसम में किसी तरह की बीमारी का इलाज करा रहे मरीज को प्रदूषण से बचाव के लिए सतर्क रहने की जरूरत है।
घर के अंदर ऐसे दूर करें प्रदूषण
कमरे में हीटर, वार्मर या ड्रायर चलाने से बचें।
सुबह के समय खिड़की दरवाजे बंद रखें
अगर कमरे में धुएं का एहसास हो तो गीला तौलिया चारों तरफ घुमाएं
कालीन और पायदान साफ रखें।
वैक्यूम क्लीनर का प्रयोग करें।
पीएम 2.5 मानक से चार गुना बढ़ा
साहिबाबाद। रविवार को शहर में 394 एक्यूआई से लोगों की सांसें फूलती रहीं। पीएम10 के मानक से साढ़े तीन गुना ज्यादा होने से लोगों को आंखों में जलन होती रही। पीएम 2.5 मानक से चार गुना बढ़ गया, जो अधिकतम 500 तक पहुंच गया। पीएम10 भी 370 मापा गया जो अधिकतम 465 रहा। इससे लोगों में एलर्जी, खांसी और फेफड़ों में सिकुड़न का खतरा बढ़ गया। हैरत की बात है कि जिम्मेदार 20 विभाग के अधिकारी प्रदूषण खत्म करने में महज खानापूर्ति कर रहे हैं। अधिकारी धरातल पर काम करने के जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे हैं। जगह-जगह कूड़ा जल रहा है। सीपीसीबी के अनुसार, सोमवार और मंगलवार को भी वायु गुणवत्ता सूचकांक गंभीर श्रेणी में पहुंच सकता है। ब्यूरो
चिकित्सक ने यह दिए सुझाव
सुबह-शाम में टहलना बंद करना होगा, जरूरी काम होने ही घर से बाहर निकलें, घर का दरवाजा और खिड़की बंद रखें जिससे प्रदूषित हवा कमरे के अंदर नहीं आ सके। अगर हो सके तो कमरे के अंदर एयर प्यूरीफॉयर लगाए, ज्यादा से ज्यादा पानी पीयें, ड्राई फ्रूट्स, फल ज्यादा खाएं। अगर किसी प्रकार की समस्या आ रही है तो डॉक्टर से सलाह लें।
पीएम10 का दुष्प्रभाव : एलर्जी, खांसी, जुकाम, सांस की नली में सिकुड़न, फेफडे में सूजन, अस्थमा, सीओपीडी की समस्या, रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना, किडनी को नुकसान, तनाव, बच्चों के मानसिक विकास में बाधा
पीएम2.5 का असर : पीएम10 की अपेक्षा पीएम2.5 स्वास्थ्य के लिए खतनाक है। विशेषज्ञों के अध्ययन के अनुसार वातावरण में पीएम2.5 का स्तर मानक से थोड़ा बढ़ने पर इमरजेंसी में सांस के मरीज 25 से 20 प्रतिशत बढ़ जाते हैं। यह फेफडे़ के साथ-साथ दिल व मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाता है। इसमें सांस की बीमारियां, बीपी, धमनियों में ब्लॉकेज, हार्ट-अटैक व अन्य बीमारययां हो सकती हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय प्रबंधक विकास मिश्र का कहना है कि हवा की गति तेज होने से प्रदूषण में कमी आएगी। ग्रैप के नियमों का जहां-जहां पालन नहीं हो रहा है। टीम उन जगहों को चिन्हित कर रही है।