सिर्फ शहीद नगर में ही नहीं बल्कि टीएचए में करीब एक दर्जन से अधिक रिहायशी कालोनियों में जैकेट फैक्ट्री जैसे हादसे का खतरा मंडरा रहा है। इन कालोनियों में 500 से अधिक अवैध फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिनमें कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। 13 लोगों की जान जाने के रशासन ने यदि सख्ती नहीं दिखाई तो आग और धुएं से और भी कई और जानें जा सकती हैं।
टीएचए में राजीव कालोनी, पप्पू कालोनी, डीएलएफ, डिफेंस कालोनी, भोपुरा, राजीव कालोनी, गणेशपुरी, शालीमार गार्डन, पंचशील, करहेड़ा, कड़कड़ मॉडल, शहीद नगर और खोड़ा में 500 से अधिक अवैध फैक्ट्रियां हैं। रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से चल रहीं इन फैक्ट्रियों में पॉलिश, प्लास्टिक दाना, प्लास्टिक गुल्ला, जींस रंगाई और तेजाब का इस्तेमाल होता है।
बगैर किसी फायर एनओसी, लाइसेंस और कामर्शियल बिजली कनेक्शन के चल रहीं इन फैक्ट्रियों से लाखों की आबादी पर खतरा मंडरा रहा है। रिहाइशी इलाकों में अवैध फैक्ट्रियों के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका डालने वाले एक्टीविस्ट राजीव कुमार शर्मा का कहना है कि कार्रवाई में सबसे ज्यादा परेशानी साहिबाबाद में ही आती है।
लोनी और मुरादनगर में प्रशासन का सहयोग जिस तरह से मिलता है, साहिबाबाद में कार्रवाई की बात आते ही हाईकोर्ट के आदेश को ही ताक पर रख दिया जाता है।एनजीटी या हाईकोर्ट का आदेश नहीं हो तो टीएचए में फैलते प्रदूषण को रोकने की दिशा में कभी कार्रवाई ही नहीं हो। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास कार्रवाई का अधिकार नहीं है और प्रशासन सुध नहीं लेता है।
रिहाइश के बीच धड़ल्ले से चल रही अवैध फैक्ट्रियों से हो रहे प्रदूषण से परेशान हैं। हवा जहरीली होने के साथ ही केमिकल युक्त पानी भूजल में मिल रहा है, चिमनियां हैं नहीं तो धुआं यूूं ही छोड़ा जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी महज नोटिस ही जारी कर सकता है, कार्रवाई का अधिकार उसके पास नहीं है।
जेल भेजे गए फैक्ट्री संचालक
शहीद नगर के लोगों के जेहन से शुक्रवार की खौफनाक सुबह का मंजर नहीं निकल पा रहा। जयपाल चौक की मार्केट की ज्यादातर दुकानें शनिवार को भी बंद रहीं। दूसरी तरफ, शुक्रवार शाम गिरफ्तार किए गए जैकेट फैक्ट्री संचालक नजाकत और रिजवान को पुलिस ने मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर जेल भेज दिया है।
शनिवार को भी आग के हवाले हुई फैक्ट्री के बाहर लोगों का जमावड़ा लगा रहा। जैकेट फैक्ट्री से कर्मचारियों को बचाने के लिए फैक्ट्री में घुसे नौशाद चौधरी ने बताया कि हादसे ने उन्हें बुरी तरह दहला दिया है। रह-रहकर आंखों के सामने पूरा मंजर आ जाता है।
जैकेट फैक्ट्री में आग से निकले धुएं में लिपटी सुबह में एक के बाद एक 13 लाशों का निकलना दिलोदिमाग पर हावी है। कोहराम की आवाजें लोगों के कानों में अब तक गूंज रही हैं।
शहीद नगर के निवासियों के चेहरे पर हादसे की दहशत साफ झलक रही है। उधर, जैकेट फैक्ट्री के लिए अपना मकान किराए पर देने वाला बाबू फरार है। पुलिस का कहना है कि उसकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
बोले लोग
क्षेत्र में इतना बड़ा हादसा पहली बार हुआ है। आंखों के सामने अब भी वह खौफनाक मंजर आ रहा है। लोग हादसे को भूल नहीं पा रहे हैं। -शादाब
आग के दौरान चीखने चिल्लाने की आवाजें कानों में गूंज रहीं हैं। कर्मचारियों को बचाने का काफी प्रयास किया लेकिन उन्हें बचा नहीं सके। -शाकिर चौधरी
एक साथ 13 लोगों की मौत से स्थानीय लोग काफी दुखी हैं। फैक्ट्री के सामने अभी भी लोगाें का जमावड़ा लगा हुआ है। - मोहम्मद साजिद
शुक्रवार हादसे का मंजर काफी खौफनाक था। उस मंजर के जहन में आते ही अभी भी रौंगटे खड़े हो जाते हैं। -आरिफ
अवैध फैक्ट्री संचालकों में हड़कंप, हुए गायब
जैकेट फैक्ट्री में अग्निकांड से शहीद नगर के जयपाल चौक के आसपास चल रही अवैध फैक्ट्रियों के संचालकों में हड़कंप मच गया है। कार्रवाई के खौफ से अवैध फैक्ट्री संचालक कालोनी से गायब हो गए हैं। दूसरी तरफ, जैकेट फैक्ट्री पर पुलिस ने ताला लगा दिया था, जिसे किसी ने तोड़ दिया है। पुलिस फिर से फैक्ट्री को सील करने की तैयारी कर रही है।
शहीद नगर में अवैध रूप से जैकेट, डाइंग, निकल पॉलिश और प्लास्टिक दाना की फैक्ट्रियां चल रहीं हैं। जैकेट फैक्ट्री में आग लगने से 13 लोगों की मौत पर बाकी फैक्ट्री संचालकों में खौफ है कि अब प्रशासन उन पर कार्रवाई करेगा।
शनिवार को ऐसी फैक्ट्रियां खुलीं ही नहीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जैकेट फैक्ट्री संचालकों की गिरफ्तार से सभी डरे हैं और मामला ठंडा होने के इंतजार में हैं। उधर, जैकेट फैक्ट्री को अभी तक प्रशासन की ओर से सील नहीं किया गया है, वहां लोगों का आना जाना जारी है।
पुलिस और प्रशासन की कोई भी टीम मौके पर नहीं पहुंची। इस संबंध में एएसपी साहिबाबाद अनूप सिंह ने बताया कि प्रशासन से इलाके में चल रही अवैध फैक्ट्रियों पर नकेल कसने के लिए प्रशासन से बात की गई हैं।
सर्वे कर सभी फैक्ट्रियों को चिन्हित कर सूची तैयार की जाएगी। मानकों को तक पर रख कर चल रही फैक्ट्रियों पर कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को पुलिस ने फैक्ट्री के गेट पर ताला लगा कर उसे बंद कर दिया था। हो सकता है किसी ने ताला तोड़ दिया हो, फिर से फैक्ट्री को सील किया जाएगा।
अधिक लोड का इस्तेमाल हो सकती है शॉर्ट सर्किट की वजह
जैकेट फैक्ट्री में बिजली आपूर्ति के लिए चार किलोवाट का कनेक्शन लिया गया था, जिस पर फैक्ट्री की लाइट, पंखे, करीब दो दर्जन सिलाई मशीनें और सबमर्सिबल का लोड था। आग में बिजली पैनल पूरी तरह से जल चुका है।
माना जा रहा है कि लोड ज्यादा होने के चलते पैनल का कोई तार ढीला हो गया होगा, जिसके चलते शॉर्ट सर्किट हुआ है। ग्राउंड फ्लोर से पहली और दूसरी मंजिल तक तारे जा रहीं थीं, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि ग्राउंड फ्लोर पर शॉर्ट सर्किट हुआ और तारों के जरिए चिंगारी ऊपर की मंजिलों तक पहुंची होगी।
बच सकती थीं कई जानें, धुएं से रास्ता हो गया था ब्लॉक
फैक्ट्री में शॉर्ट सर्किट ग्राउंड फ्लोर पर होना बताया जा रहा है, सिलाई मशीनों के लिए लगे तारों के साथ आग ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गई। इसके साथ ही फोम और रेक्सीन जलने से ऊपरी मंजिलों में धुआं भर गया। सीढ़ियों में भी रखे सामान में भी आग लगने से रास्ता बंद हो गया। इसकी वजह से फैक्ट्री में फंसे कर्मचारियों को भागने की जगह ही नहीं मिली। धुआं नहीं होता तो कई कर्मचारियों की जिंदगी बच सकती थी।
एएसपी अनूप सिंह का कहना है कि घटना स्थल को देखने से ऐसा लग रहा है कि धुआं फैलने के चलते कर्मचारियाें की मौत हुई है, जिसके बाद आग फैलने से वह जल गए। उन्होंने बताया कि ऊपरी मंजिल पर रखी सिलाई मशीनें पूरी तरह से नहीं जली है। इससे ऐसा लग रहा है कि ऊपरी मंजिल पर आग पूरी तरह से नहीं फैल पाई थी, धुआं ही मौत की मुख्य वजह रहा है।