गाजियाबाद। दिल्ली से अमृतसर जा रही फ्रंटियर मेल (गोल्डन टेंपल) ट्रेन में हुए बम विस्फोट मामले में अब्दुल करीम टुंडा पर बम धमाका करने का आरोप है। इस मामले में 26 साल बाद भी सिर्फ गवाही चल रही है। 59 गवाहों में से अभी तक सिर्फ 12 की गवाहों के ही बयान दर्ज हो पाए हैं। पिछले कई महीने से टुंडा अदालत में भी पेश नहीं हुआ। पिछली सुनवाई पर वीडियो कान्फ्रेंसिंग से टुंडा की पेशी हुई थी।
जिला शासकीय अधिवक्ता राजेशचंद्र शर्मा का कहना हे कि अधिकांश गवाह पंजाब प्रांत के अलग-अलग जिलों के रहने वाले थे। बार-बार नोटिस भेजे जाने के बाद भी गवाह अदालत में पेश नहीं हो रहे हैं। इस कारण से मुकदमे में गवाही पूरी नहीं हो पा रही है। यह भी जानकारी नहीं है कि किस गवाह की मौत हो चुकी है और कौन जीवित है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता श्याम सिंह नागर ने बताया कि वर्ष 1997 में दिल्ली से मुंबई से अमृतसर की तरफ जा रही फ्रंटियर मेल ट्रेन में साहिबाबाद स्टेशन के पास पहुंचने पर सामान्य कोच में बम विस्फोट हुआ था। इसमें एक सिपाही समेत 12 लोग घायल हो गए, जबकि एक की मौत हो गई थी। घटना का मुकदमा जीआरपी ने दर्ज करते हुए मामले की जांच की। जांच में पता चला कि बम विस्फोट की घटना को पिलखुवा निवासी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा ने अंजाम दिया था। इसके बाद पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी। लंबे समय तक टुंडा को जीआरपी और पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई थी। 16 अगस्त 2014 को दिल्ली पुलिस ने उसे भारत नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार किया था।