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कुत्तों का आतंक, उस पर रैबीज के इंजेक्शन खत्म

Sun, 27 Nov 2016 11:38 PM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
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स्ट्रीट डॉग्स - फोटो : file photo
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आवारा कुत्तों के आतंक से रेजिडेंट्स परेशान हैं। आए दिन राह चलते लोगों को ये कुत्ते काट रहे हैं। इससे भी ज्यादा परेशानी की बात ये है कि सरकारी अस्पतालों में दो महीने से रैबीज के इंजेक्शन खत्म हो चुके हैं। ऐसा ही हाल सीएचसी और पीएचसी का भी है।सप्ताह भर पूर्व कुछ मेडिकल स्टोर पर रैबिज के इंजेक्शन मिल रहे थे लेकिन अब वहां भी खत्म हो चुके हैं।
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इस मामले में सीएमओ का कहना है कि प्रदेश भर में एंटी रैबीज के इंजेक्शन की भारी कमी है। इसका कारण दवा कंपनी के कांट्रेक्ट का नवीनीकरण नहीं हो पाना बताया जा रहा है। कुत्ते के काटने के बाद प्राइवेट अस्पतालों का ही सहारा ले रहे हैं लेकिन यहां भी अब स्टाक खत्म हो रहा है। एमएमजी में पिछले दो माह से रैबीज इंजेक्शन खत्म हो चुके थे।

संयुक्त जिला अस्पताल में भी इस सप्ताह इंजेक्शन खत्म हो गया है। दरअसल एमएमजी में इंजेक्शन खत्म होने के बाद  से संयुक्त जिला अस्पताल में कुत्ता काटे के मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई थी। ऐसे में जो स्टॉक था वहां भी खत्म हो गया और नया स्टॉक अभी नहीं आया है। ऐसे में मरीजों को अस्पतालों से लौटाया जा रहा है।
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एमएमजी के सीएमएस डॉ. जेके त्यागी ने बताया कि शासन को लगातार पत्र लिखा जा चुका है, मगर अभी तक सप्लाई नहीं आ पाई है। आश्वासन मिला है कि कुछ दिनों में दवा आने वाली है। डिमांड भेजी गई है लेकिन कंपनी की तरफ से दवा की सप्लाई नहीं हो रही है। दूसरी ओर दवा विक्रेताओं का कहना है कि एक खास कंपनी का रैबीज का इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है।

बाकी अन्य कई कंपनियों की दवाएं आती हैं, वह सभी बाजार में उपलब्ध है।प्राइवेट अस्पताल में होगा ढाई से पांच हजार तक खर्चाबाजार में रैबीज के इंजेक्शन का रेट 300 से 500 रुपये है। रैबीज से बचाव को करीब चार इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं। ऐसे में प्राइवेट डाक्टर की फीस और दवाओं का मिलाकर ढाई से पांच हजार तक का खर्चा मरीजों को उठाना पड़ेगा।
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