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UP: क्लीनिक में चोरी करने घुसा था किशोर, शटर और दीवार के बीच फंसी गर्दन, आठ घंटे तक लटका रहा; देखें वीडियो

Sun, 12 Apr 2026 02:08 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद

सार

गाजियाबाद में चोरी करने घुसे किशोर की गर्दन क्लीनिक के शटर में फंस गई। आठ घंटे तक उसकी जान फंसी रही। पुलिस और दमकल टीम ने करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद किशोर को बाहर निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया। 
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चोरी करने घुसे किशोर की गर्दन क्लीनिक के शटर में फंसी, आठ घंटे फंसी रही जान - फोटो : वीडियो ग्रैब
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विस्तार
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गाजियाबाद जिले के इंदिरापुरम इलाके के अभयखंड स्थित हार्ट एंड केयर क्लीनिक में चोरी करने घुसे 15 वर्षीय किशोर की गर्दन शटर और दीवार के बीच फंस गई। करीब आठ घंटे तक वह लटका रहा। उसका सिर क्लीनिक के बाहर और बाकी शरीर अंदर था।
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शनिवार सुबह करीब पांच बजे उसके क्लीनिक में घुसने की बात कही जा रही है, जबकि घटना का पता सुबह करीब 11 बजे स्टाफ के क्लीनिक पहुंचने पर चला। पुलिस और दमकल टीम ने करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद किशोर को बाहर निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया। 

चिकित्सक ने किशोर के खिलाफ अभी शिकायत नहीं दी है। एसीपी इंदिरापुरम अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि दिल्ली निवासी डॉ. पवन शर्मा का अभयखंड में हृदय रोग से संबंधित क्लीनिक है। वह सप्ताह में दो-तीन दिन ही यहां आते हैं। उन्हीं दिनों में स्टाफ भी आता है। डॉ. पवन शनिवार को क्लीनिक आने वाले थे।
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इससे पहले सुबह करीब 11 बजे क्लीनिक कर्मचारी पहुंचे और शटर खोलने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं खुला। कर्मचारी ने जोर लगाया तो किशोर चीख पड़ा, जिससे कर्मी डर गया। उसने ऊपर देखा तो किशोर का सिर बाहर था और शरीर क्लीनिक के अंदर था। उन्होंने डॉ. पवन को कॉल किया और फिर पुलिस की सूचना दी।

 

क्लीनिक के पिछले रास्ते का शटर खोला और सभी लोग अंदर पहुंचे। वहां देखा तो किशोर बेसुध था। पुलिस और दमकल की टीम ने करीब दो घंटे तक रेस्क्यू अभियान चलाया, तब जाकर किशोर को किसी तरह निकाला जा सका। गर्दन फंसे होने के कारण किशोर का चेहरा भी चोटिल हो गया, जिससे खून निकल रहा था। उसे नीचे उतारने के बाद पुलिस ने अस्पताल पहुंचाया।
 

शटर पीटा लेकिन नहीं निकली आवाज
होश आने पर किशोर ने पुलिस को बताया कि वह खोड़ा का रहने वाला है और चोरी के इरादे से सुबह क्लीनिक में घुसा था। हालांकि, समय की जानकारी होने से उसने इन्कार कर दिया।

 

उसने पुलिस को बताया कि शटर और दीवार के बीच खाली जगह में पैर डालते समय फिसल गया, जिससे गर्दन फंस गई। क्लीनिक की ऊंचाई अधिक होने और सपोर्ट न मिलने की वजह से निकल नहीं पाया। उसने हाथ-पैर से शटर पीटा, लेकिन आवाज बाहर तक नहीं पहुंची। कुछ देर तक तो उसने निकलने का प्रयास किया, लेकिन थकने के बाद हार मान ली। इसके बाद वह बेसुध हो गया।

 
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तीन-चार घंटे और फंसा रहता तो बचना था मुश्किल
पुलिस ने बताया कि किशोर करीब 8 घंटे तक शटर में फंसा रहा था और इससे उसकी हालत काफी खराब हो गई थी। जब अस्पताल लेकर पहुंचे तो चिकित्सकों का कहना था कि यदि तीन से चार घंटे और नहीं लाया जाता तो किशोर की मौत हो सकती थी।



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