देश-प्रदेश में गाजियाबाद का मान बढ़ाने वाली छात्राओं ने अपनी सफलता को मां के त्याग और हौसलों का परिणाम बताया। मां के मार्गदर्शन की बदौलत ही छात्राओं ने एकेटीयू रिजल्ट के साथ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में लड़कों को पछाड़कर टॉपर्स लिस्ट में पहला स्थान हासिल किया।
एकेटीयू के सत्र 2015-16 में पहला चांसलर और गोल्ड मेडल जीतने वाली एकेजी इंजीनियरिंग कॉलेज की छात्रा आयुषी अग्रवाल ने मां के मोटिवेशन को सफलता का मूलमंत्र बताया। वहीं, 22 वर्ष की आयु में सीए व सीएस परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली सुरभि बंसल अपनी सफलता का श्रेय मां को देती हैं।
उधर, किसान परिवार की बेटी अनुपम ने एकेटीयू फर्स्ट सेमेस्टर के रिजल्ट में 93 प्रतिशत अंकों के साथ सीएस ब्रांच में यूपी टॉप किया है।
बेटी की खातिर छोड़े शादी-समारोह
एकेटीयू का पहला चांसलर मेडल व बीटेक सीएस में गोल्ड मेडल जीतने वाली एकेजी इंजीनियरिंग कॉलेज की छात्रा आयुषी अग्रवाल की मां रुचि अग्रवाल ने बेटी के सपनों को पूरा करने लिए शादी-समारोह में ही जाना छोड़ दिया।
रुचि अग्रवाल बताती हैं कि स्कूल से लेकर कॉलेज के आखिरी साल तक बेटी के करियर के लिए कई सालों तक पारिवारिक समारोह से दूरी बनाकर रखी। स्कूल के दिनों में बेटी के खाने के साथ हर जरूरत का ध्यान रखा।
फिर बीटेक की पढ़ाई के दौरान जब मौका मिलता तब गाजियाबाद जाकर बेटी के तनाव नहीं लेने और सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ने की सीख दी। घर के कामों से दूर रखने के साथ पढ़ाई के लिए टाइम से उठना और समय की कद्र करने की सीख भी दी।
हौसले ने कठिन राह की आसान
22 साल की उम्र में सीए फाइनल के साथ सीएस ऑल इंडिया 21वीं रैंक पाने वाली सुरभि बंसल की कामयाबी में उनकी मां संगीता बंसल का सबसे बड़ा योगदान है। मां के हौसले और मार्गदर्शन की बदौलत ही सुरभि ने चार्टर्ड एकाउंटेंट और कॉस्ट एकाउंटेंट की कठिन डिग्री हासिल की।
संगीता बंसल ने बताया कि सीए व सीएस की तैयारी में अपना गोल निर्धारित रखना, पढ़ाई पर फोकस और तनाव से पास पाना बेहद जरूरी होता है। उनकी हर बात को सुरभि ने गंभीरता से अपनाकर लक्ष्य हासिल किया। परिवार से ही सुरभि ने हर मुश्किल को सकारात्मक नजरिए से लेने और कभी हिम्मत नहीं हारने की कला सीखी।
सुरभि ने हुडको में नौकरी हासिल कर एक और सफलता प्राप्त की है।
पेपर में बेटी पड़ी बीमार, तो मां ने नोट्स किए तैयार
एकेटीयू के बीटेक फर्स्ट सेमेस्टर के रिजल्ट 93 फीसदी अंकों के साथ सीएस ब्रांच में यूपी टॉप करने वाली किसान की बेटी अनुपम ने मां रमा के मार्गदर्शन और परिश्रम के चलते सफलता हासिल की।
पांचवीं क्लास में फाइनल एग्जाम के वक्त अनुपम को चिकन पॉक्स होने पर मां रमा ने सभी नोट्स तैयार किए, जिसे पढ़कर अनुपम ने परीक्षा उत्तीर्ण की। आज भी किसी न किसी रूप में मां रमा अनुपम की पढ़ाई में मदद करती हैं। मां रमा ने बताया कि स्कूल के बाद कॉलेज में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए बेटी का हमेशा हौसला बढ़ाया।
बेटी की पढ़ाई के लिए कई बार पारिवारिक समारोह से भी दूरी बनाई। बेटी ऊंचा मुकाम हासिल करे, इसलिए उसके खाने के साथ हर जरूरत का ध्यान रखा है। अपने सपनों और परिवार वालों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए अनुपम भी कड़ी मेहनत कर रही है।