राम बहादुर शर्मा मूलरूप से बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला है। 23 नवंबर 2017 की शाम को राम बहादुर बच्ची को ट्यूशन पढ़ाने के लिए घर आया था। बच्ची जब ट्यूशन पढ़ रही थी, उसकी मां पड़ोस की दुकान से कुछ सामान लेने के लिए चली गई। वापस आने पर देखा कि राम बहादुर शर्मा बच्ची के साथ दुष्कर्म का प्रयास कर रहा है।
बच्ची की मां ने उसी समय फोन पर यह बात अपने पति को बताई। शोर-शराबा सुनकर आसपास के लोगों इकट्ठे हो गए। उन्होंने ट्यूटर राम बहादुर शर्मा को मौके पर पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने राम बहादुर शर्मा को दुष्कर्म का प्रयास, पोक्सो अधिनियम की धाराओं में जेल भेज दिया।
मामले की अंतिम सुनवाई शुक्रवार को पोक्सो कोर्ट सेकंड न्यायाधीश दीपिका तिवारी की अदालत में हुई। मामले मे सात गवाह पेश किए गए। अदालत ने पेश सबूत और गवाहों के बयान के आधार पर ट्यूटर राम बहादुर शर्मा को दोषी मानते भी 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 25 हजार रुपए के अर्थ से दंडित किया। मामले में पीड़िता के बयान अहम रहे।