गाजियाबाद। जिले में फर्म खोलकर कारोबार करने और बकाया टैक्स लेकर गायब होने वाली 50 से अधिक फर्मों की तलाश के लिए जीएसटी के अधिकारी जुट गए हैं। इन फर्मों पर लगभग 100 करोड़ रुपये का टैक्स फर्मों और ट्रांजिट पास लेकर आए वाहनों पर बकाया है।
राज्यकर विभाग की ओर से इन फर्मों के पतों पर आरसी जारी की जा चुकी है, लेकिन न तो वहां फर्म मिली और न ही कोई कर्मचारी। ऐसे में इनसे कर की वसूली नहीं हो पायी है। अब राज्यकर विभाग के अधिकारी इन फर्मों का ब्यौरा खंगाल रहे हैं। इनके संचालकों का नया ठिकाना खोजा जा रहा है। ताकि इनसे टैक्स की वसूली की जा सके।
दरअसल, बेहतर सुविधाएं, संसाधन और कनेक्टिविटी की वजह से दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड और आसपास के अन्य राज्यों के लोगों ने अपनी फर्मों को गाजियाबाद में पंजीकृत करा रखा है। इनमें से करीब 50 से ज्यादा ऐसी फर्में हैं जिन पर टैक्स बकाया था, लेकिन बीच में ही उन्होंने अपने कारोबार को शहर से समेट लिया। जीएसटी रिटर्न के साथ टैक्स जमा करने की बजाए इन फर्मों ने दूसरे प्रदेशों में दूसरे नामों से कारोबार शुरू कर दिया। ऐसे में इन फर्मों पर जीएसटी की बकायेदारी अभी भी है।
ट्रांजिट पास बनवाकर भी कर रहे जीएसटी चोरी :
ट्रांजिट पास बनवाकर भी जीएसटी की चोरी की जा रही है। करीब 250 से ज्यादा वाहन जिले में ट्रांजिट पास लेकर दाखिल हुए थे लेकिन उनके ई-वे बिल पर अनलोडिंग का जो स्थान दर्ज था, वहां पहुंचे ही नहीं। इन राज्यों को यूपी से बाहर उत्तराखंड, हरियाणा आदि राज्यों में जाना था। वाहनों को ट्रेस किया गया तो पता चला कि इन वाहनों ने अन्य राज्यों में जाने की बजाय यूपी में ही माल अनलोड कर दिया। इन वाहनों से भी करीब 20 करोड़ से ज्यादा टैक्स और जुर्माना वसूला जाना है। ट्रक नंबर, बहती पर दर्शाए गए फर्म के नाम के आधार पर राज्यकर विभाग ने इनके खिलाफ वसूली की आरसी जारी की हुई है, लेकिन यह वाहन ट्रेस नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे मामलों में माल भेजने वाली फर्म और माल ढुलाई करने वाले वाहन दोनों बाहरी राज्य में पंजीकृत होते हैं। इसलिए स्थानीय अधिकारी उन्हें ट्रेस नहीं कर पा रहे हैं।
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वर्जन
जिन फर्मों और वाहनों के विरुद्ध आरसी जारी की गई है। इनकी तेजी से तलाश की जा रही है। दूसरे प्रदेश के भी राज्यकर विभागों से इस विषय में संपर्क किया जा रहा है। किस जगह पर किस नाम से फर्मों का संचालन किया जा रहा है। इसकी जानकारी भी की जा रही है। ऐसे फर्मों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
भूपेंद्र शुक्ल, अपर आयुक्त ग्रेड-1 जोन दो