गाजियाबाद। राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) ने गाजियाबाद, नोएडा और फर्रुखाबाद में एक साथ छापे मारकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) क्लेम में धांधली का खुलासा किया है। गाजियाबाद के वसुंधरा स्थित पते पर पंजीकृत एसएसजी इंफ्राटेक प्रा. लि. नामक फर्म की जांच में बोगस कंपनियों से खरीद दिखाकर 1.72 करोड़ रुपये से ज्यादा का आईटीसी क्लेम किया गया। तीनों शहरों में दबिश देने पहुंची जांच टीम को ऐसी कोई फर्म नहीं मिली, जिनसे दस्तावेज में खरीद-बिक्री दिखाई गई है।
राज्य कर विभाग के अपर आयुक्त ग्रेड-1 दिनेश कुमार मिश्र ने बताया कि एसएसजी इंफ्राटेक प्रा. लि. नाम की कंपनी केंद्रीय जीएसटी विभाग में पंजीकृत है। फर्म की ओर से घोषित तीन व्यापार स्थलों पर शुक्रवार को राज्य कर विभाग के 11 अधिकारियों की टीम ने एक साथ जांच की कार्रवाई शुरू की थी, जो देर रात तक चली। मुख्य रूप से यह फर्म वर्क कांट्रेक्ट की सेवाओं के लिए पंजीकृत है। फर्म की ओर से दाखिल किए जा रहे जीएसटी रिटर्न और डाउनलोड किए जा रहे ईवे बिल की बिजनेस इंटेलिजेंस एंड फ्रॉड एनालिसिस (बीफा) के माध्यम से जांच कराने पर पता चला एसएसजी इंफ्राटेक ने एक करोड़ 72 लाख 53 हजार का आईटीसी ऐसी फर्मों से क्लेम किया है जो अस्तित्व में नहीं हैं। फर्म का मुख्य व्यापार स्थल पत्रकार परिसर वसुंधरा गाजियाबाद के पते पर दिखाया गया। टीम जांच के लिए मौके पर पहुंची तो इस पते पर एसएसजी इंफ्राटेक नाम की कोई फर्म या व्यापारिक गतिविधि संचालित नहीं थी। इसी तरह फर्रुखाबाद के घोषित पते की जांच में भी किसी प्रकार की व्यापारिक गतिविधि नहीं पाई गई। वहीं, नोएडा स्थित पते पर टीम पहुंची तो वहां फर्म का कार्यालय तो पाया गया, लेकिन मौके पर मौजूद कर्मचारी जांच टीम के समक्ष कोई अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सके और न ही किसी प्रकार का स्पष्टीकरण दे सके। जांच टीम ने नोएडा स्थित परिसर को अगली विधिक कार्रवाई पूरी होने तक के लिए सील कर दिया है। अपर आयुक्त ग्रेड-2 एसआईबी ओपी तिवारी के निर्देशन में देर रात तक यह कार्रवाई चली। संयुक्त आयुक्त विशाल पुंडीर, उप आयुक्त अनुराग बरोलिया, उपायुक्त श्वेता तोमर, सहायक आयुक्त राहुल गौतम, व अनुज कुमार ने जांच टीमों का नेतृत्व किया।
बाइक और कार से लोहा-स्टील की ढुलाई
जांच में पाया गया कि मोटर साइकिल और मारुति ईको कार से लोहा और स्टील की ढुलाई दिखाते हुए खरीद प्रदर्शित करते हुए आईटीसी का लाभ लिया गया। संबंधित फर्म ने सरकारी विभाग को भी सेवा दी और उनसे भुगतान भी प्राप्त किया, लेकिन कई मामलों में जीएसटी रिटर्न घोषित नहीं किया गया। फर्म ने अपने वार्षिक रिटर्न जीएसटी आर 9 और जीएसटी आर 9सी भी दाखिल नहीं किए। जांच टीमों ने पोर्टल पर जांच की तो फर्म के निदेशक का नाम हरजीत साहनी पता चला। पोर्टल पर दर्ज मोबाइल नंबर पर लगातार संपर्क साधने पर भी टीम को कोई जवाब नहीं मिला और किसी भी अधिकृत व्यक्ति को जांच टीम के समक्ष नहीं भेजा गया।