गाजियाबाद। नगर निगम की 1702 दुकानों का किराया बढ़ाने के विरोध में उतरे व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ व्यापारियों ने बैठक की, लेकिन नतीजा नहीं निकला। इसकी वजह से मंगलवार को भी व्यापारियों का विरोध जारी रहा। उन्होंने घंटाघर स्थित शहीद भगत सिंह की प्रतिमा के पास धरना देकर नगर निगम के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं, उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष मुकुंद मिश्रा ने इस प्रकरण के लिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है।
सोमवार रात करीब आठ बजे से साढ़े नौ बजे तक व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल और नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक के बीच वार्ता हुई। प्रतिनिधिमंडल में शामिल व्यापारी नेता राजू छाबड़ा, गोल मार्केट व्यापार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव लाहोरिया, व्यापारी नेता राकेश स्वामी समेत दो अन्य लोग शामिल रहे। राजू छाबड़ा ने बताया कि नगरायुक्त के समक्ष पूर्व में बढ़ाए गए किराए और अनुबंध की शर्ताें के संबंध में वार्ता हुई। व्यापारियों ने नियमों के अनुसार किराया बढ़ाने की बात कही, उन्होंने कहा कि एक साथ 18 गुना तक किराया बढ़ाना न्यायोचित नहीं है।
वहीं, नगरायुक्त और मुख्य कर निर्धारण अधिकारी ने निगम का पक्ष रखा। तकरीबन डेढ़ घंटे चली बैठक बेनतीजा खत्म हो गई। इसके बाद व्यापारियों ने मंगलवार को भी धरना जारी रखा। सुबह करीब 10 बजे पुरानी सब्जी मंडी, गोल मार्केट, कविनगर सी-ब्लॉक मार्केट, रामानुज दयाल मार्केट, नया बस अड्डा मार्केट के दुकानदारों के अलावा विभिन्न व्यापार मंडल के पदाधिकारी घंटाघर पहुंचे। यहां धरना देकर नगर निगम की किराया बढ़ाने की नीति और फैसले का विरोध किया। व्यापारी नेता राकेश स्वामी व राजू छाबड़ा ने बताया कि धरने में निर्णय लिया गया कि जब तक व्यापारियों की मांग पूरी नहीं होगी, तब तक धरना जारी रखेंगे।
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व्यापारियों ने दिया किराया बढ़ाने का फार्मला
व्यापारियों का कहना है कि जिस तरह से वर्ष 1997 में तत्कालीन अधिकारियों ने पूर्व में दिए जा रहे किराये का पुनर्निर्धारण करके दो रुपये प्रति वर्गफुट के हिसाब से किराया तय कर दिया था, उसी तरह इस बार भी बीच का रास्ता निकालकर किराया बढ़ा लिया जाए। अन्यथा जिस तरह आगरा और मेरठ जैसे शहर में नगर निगम की ओर से मूल किराये में 25 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है, उस तरह से किराया बढ़ा लिया जाए। इस फार्मूले पर निगम अधिकारी व्यापारियों से वार्ता करे तो व्यापारी सहमति बना सकते हैं।
नेताओं का स्वागत नहीं करेंगे व्यापारी
किराया बढ़ाए जाने के विरोध में चल रहे आंदोलन में जनप्रतिनिधि, स्थानीय विधायक, सांसद ने अपनी उपस्थिति नहीं दी है। न ही व्यापारियों से वार्ता कर प्रकरण को सुलझाने का प्रयास किया है। इससे व्यापारियों में आक्रोश है। उनका कहना है कि चुनाव के समय में बाजारों में नेताओं का स्वागत किया जाता है, उन्हें वोट देकर जिताया जाता है, लेकिन अगर व्यापारियों के इस मामले में सुनवाई नहीं हुई तो किसी भी नेता का बाजारों में स्वागत नहीं किया जाएगा। यह निर्णय सभी व्यापार मंडल और शहर के प्रमुख बाजारों के व्यापारियों ने लागू करने का फैसला किया है।
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नगरायुक्त बोले
नगरायुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक का कहना है कि व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल से वार्ता हुई थी, हमने उन्हें कमेटी बनाकर सुनवाई करने का भरोसा दिया था। बिना सुनवाई के किराया नहीं बढ़ाने पर सहमति बन गई थी। व्यापारियों ने इस पर धरना समाप्त करने का भी आश्वासन दे दिया था लेकिन मंगलवार सुबह उन्होंने इस पर असहमति जता कर धरना फिर शुरू कर दिया।