हापुड़। जिले में स्वाइन फ्लू से एक मौत और सात पॉजिटिव केस मिलने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग गंभीर नहीं है। मरीजों के लिए आइसोलेशन वार्ड तो बनाए हैं। लेकिन पर्चा, दवा और जांच काउंटर पर हर मर्ज के मरीज एक ही कतार में लग रहे हैं। लक्षण के आधार पर पहचान के लिए न तो हेल्प डेस्क हैं और न ही अस्पतालों में ऐसी कोई सुविधा है।
स्वाइन फ्लू का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है, शासन से अलर्ट के बाद हापुड़ के सरकारी अस्पतालों में बेड रिजर्व कर दिए गए हैं साथ थी जांच की सुविधा भी शुरू करायी है। लेकिन कागजों में ही अधिकारी पूरी सतर्कता बरतते दिख रहे हैं। जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल के अंदर जाने पर आपको स्वाइन फ्लू की गंभीरता जैसा कुछ नहीं दिखेगा।
जिला अस्पताल, सीएचसी समेत तमाम अस्पतालों में हर मर्ज के मरीजों के लिए एक ही काउंटर है। बुखार, खांसी, जुकाम, त्वचा, आंख या अन्य सभी रोग के लिए एक ही काउंटर से पर्चे बन रहे हैं और दवा के लिए भी एक ही काउंटर है। जांच के लिए मरीजों में खूब धक्का मुक्की हो रही है।
स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए आवश्यक दूरी, मास्क और संक्रमित मरीज से दूर रहने की गाइडलाइन है। लेकिन अस्पतालों में ऐसा कुछ नहीं दिख रहा। जिम्मेदार भी मरीजों को टोकना मुनासिब नहीं समझ रहें। जबकि हालात यह हैं कि ओपीडी में आने वाले हर तीसरे मरीजों को खांसी, बुखार की समस्या है। इनमें स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण भी हैं, फिर भी अधिकारी सचेत नहीं हो रहे।
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-स्वाइन फ्लू के ये हैं लक्षण-
*तेज बुखार और ठंड लगना।
*सूखी खांसी और गले में खराश या दर्द।
*शरीर और मांसपेशियों में तेज दर्द।
*सिरदर्द और अत्यधिक थकान या कमजोरी।
*नाक बहना या नाक बंद होना।
*कुछ मामलों में उल्टी और दस्त की समस्या
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-मरीजों को कर रहे जागरूक-
अस्पताल में आने वाले मरीजों को स्वाइन फ्लू के लक्षण और सावधानी बरतने के प्रति जागरूक किया जा रहा है। आइसोलेशन वार्ड भी बनाए गए हैं। खांसी, जुकाम और बुखार के मरीजों के लिए अलग से काउंटर बनवाए जाएंगे।डॉ.किशोर आहूजा, सीएमओ।