प्रधानपति कृष्णवीर जून, अतुल वत्स, महंत धीरज, मोनू, महेंद्र सिंह प्रजापति आदि ने बताया कि करीब 350 साल पहले गांव का नाम सादाबाद जठेवा हुआ करता था। यह रहीसों का गांव था। गांव की महिलाएं पशुओं का चारा लेने के लिए जंगल में खेड़ा पलटे स्थान पर जाती थीं। महिलाएं जंगल में निकले चार इंच के एक पत्थर पर चारा काटने के उपकरणों पर धार लगाती थीं, धीरे-धीरे वह जमीन से स्वयं निकलने लगा। यह बात ग्रामीणों को पता चली तो उन्होंने बैलों की मदद से इसे गांव में ले जाने की कोशिश की, लेकिन बैल उसे हिला तक नहीं सके।
ग्रामीण वहीं पर शिवलिंग के रूप में पूजा करने लगे। शिवलिंग की आज करीब दो फीट है। ग्रामीणों के अनुसार महादेव मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना स्वयंभू भोलेनाथ जरूर पूरी करते हैं। ग्रामीणों का दावा है कि यह शिवलिंग स्वयंभू है, यह जमीन से अपने आप निकला है। महादेव मंदिर की दूर-दूर तक प्रसिद्धि है, महाशिवरात्रि और सावन के पूरे माह यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। प्रधानपति कृष्णवीर जून ने मंदिर का क्षेत्र बढ़ाने के लिए 30 लाख रुपये कीमत की जमीन खरीदकर मंदिर को दान की है।