- अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से कविनगर थाने में आयोजित कार्यक्रम में जैनमति उजागरमल जैन इंटर कॉलेज की छात्राओं को किया गया जागरूक
गाजियाबाद। बिना मेहनत के सफलता नहीं पाई जा सकती। ऐसे में शॉर्टकट का लालच देने वालों के झांसे में आकर साइबर अपराध का शिकार न बनें। अपराधी आपकी व्यक्तिगत जानकारी हासिल कर इसका दुरुपयोग कर सकते हैं और आपको नुकसान पहुंचा सकते हैं। ये बातें अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित दोस्त पुलिस कार्यक्रम में एसीपी कविनगर अभय राजेंद्र डागा ने छात्राओं से कहीं।
बुधवार को कविनगर थाने में आयोजित कार्यक्रम में जैनमति उजागरमल जैन इंटर कॉलेज की 35 छात्राओं ने प्रतिभाग किया। इस दौरान मुख्य अतिथि एसीपी कविनगर ने छात्राओं से कहा कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती न करें। सोशल मीडिया पर आकर्षक विज्ञापन देखकर खरीदारी के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक न करें। ऐसा करने पर आपका निजी डाटा साइबर अपराधियों के पास जा सकता है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट के लिए है, शॉपिंग वेबसाइट नहीं है।
इस अवसर पर कविनगर थाने के एसएचओ अनुराग शर्मा ने बीएनएस और आईपीसी की धाराओं में हुए बदलावों की जानकारी दी। थाने की मिशन शक्ति टीम ने छात्राओं से विद्यालय या ट्यूशन से घर आने-जाने के दौरान रास्ते में होने वाली समस्याओं के बारे में पूछा। साथ ही उनको वूमेन पावर हेल्पलाइन नंबर 1090, चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098, साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930, आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर 112 और एंबुलेंस नंबर 108 की जानकारी दी।
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कभी डायल 112 का लाभ उठाया है
कार्यक्रम के दौरान एसीपी ने छात्राओं से पूछा कि क्या कभी डायल 112 का लाभ उठाया है। इस पर छात्रा काजल ने बताया कि उनके घर के पास एक व्यक्ति नशे की हालत में हंगामा कर रहा था और वहां से गुजर रहे वाहनों पर पत्थर मार रहा था। उन्होंने तुरंत डायल 112 पर पुलिस को फोन किया था। छात्रा सिया ने बताया कि डायल 112 से पुलिस की मदद लेना बेहद आसान है। इलाके में परीक्षा के दौरान कोई तेज आवाज में गाने चला रहा था। उन्होंने तब डायल 112 को इसकी सूचना दी थी।
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छात्राओं के सवाल और अधिकारियों के जवाब
प्रश्न : एफआईआर क्या होती है और कैसे दर्ज की जाती है? -वंशिका
उत्तर : एफआईआर को प्रथम सूचना रिपोर्ट कहा जाता है। इसमें शिकायतकर्ता का नाम, पता, मोबाइल फोन नंबर, क्या अपराध हुआ है और अपराध के आरोपी से जुड़ी जानकारी जैसी जरूरी बातें दर्ज की जाती हैं।
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प्रश्न : डिजिटल अरेस्ट क्या होता है? -सपना
उत्तर : डिजिटल अरेस्ट कुछ नहीं होता है। यह एक साइबर स्कैम है। डिजिटल अरेस्ट स्कैम में फोन करने वाले कभी पुलिस, सीबीआई, नारकोटिक्स, आरबीआई और दिल्ली या मुंबई पुलिस के अधिकारी बनकर बात करते हैं। ऐसे स्कैम से सावधान रहें।