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Ghaziabad News: हड़ताल खत्म...आज से काम पर लौटेंगे वकील

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गाजियाबाद। गाजियाबाद बार एसोसिएशन ने बुधवार को वकीलों की हड़ताल खत्म हो जाने की घोषणा कर दी। एसोसिएशन का कहना है कि इसका निर्णय जिला जज अनिल कुमार से वार्ता के बाद लिया गया है। जिला जज ने वकीलों के खिलाफ दर्ज कराए गए सभी केस वापस लिए जाने का आश्वासन दिया है। इसके बाद तय किया गया कि 29 अक्तूबर से हड़ताल पर चल रहे वकील बृहस्पतिवार से न्यायिक कार्य करेंगे।
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एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक शर्मा ने वीडियो जारी कर बताया कि दोपहर तीन बजे जिला जज से वकीलों के 22 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल से वार्ता की। इस दौरान अन्य न्यायिक अधिकारी भी मौजूद रहे। एसोसिएशन के सचिव अमित नेहरा ने बताया कि न्यायिक अधिकारियों की ओर से यह भी आश्वासन दिया गया है कि 29 अक्तूबर की घटना की पुनरावृत्ति नहीं होने दी जाएगी।



उन्होंने बताया कि हड़ताल की वजह से वकीलों और वादकारियों किसी भी पत्रावली की सुनवाई की तारीख के बारे में जानकारी नहीं है। इसके देखते हुए न्यायिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि 12 और 13 दिसंबर को किसी भी पत्रावली पर प्रतिकूल प्रविष्टि नहीं दर्ज नहीं की जाएगी।
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वकीलों का प्रतिनिधि मंडल - अध्यक्ष दीपक शर्मा, सचिव अमित नेहरा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष शबनम खान, कनिष्ठ उपाध्यक्ष कपिल त्यागी, सह सचिव प्रशासन अधिवक्ता कमल किशोर के अलावा राजेंद्र चौधरी, फतेहचंद गोयल, ब्रजकिशोर गुप्ता, अनीस कुरैशी, शिवकुमार गुप्ता, सतपाल यादव, सुभाषचंद्र सक्सेना, नरेश कुमार चौधरी, सत्यकेतु सिंह, पंकज शर्मा, सुंदर त्यागी, चंद्रकांत सिंह, परमेंद्र नागर, राकेश त्यागी काकड़ा, राकेश त्यागी कैली, कपिल देव त्यागी, हरिओम शर्मा, सुधीर सहलोत, राजीव त्यागी किसौल, संजय त्यागी डबाना और कुंवार अयूब अली न्यायिक अधिकारियों से मिलने के लिए गए थे।



लाठीचार्ज के बाद शुरू हुई थी हड़ताल- 29 अक्तूबर को एक केस की सुनवाई के दौरान जिला जज अनिल कुमार और बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष नाहर सिंह के बीच कहासुनी हो गई थी। इसके बाद पुलिस ने वकीलों पर लाठीचार्ज कर दिया। इसकी प्रतिक्रिया में वकीलों पर कचहरी में तोड़फोड़ और पुलिस चौकी फूंक दिए के आरोप लगे। इसके बाद वकील हड़ताल पर चले गए थे।



कभी जाम लगाया तो कभी पुतला फूंका



( थाना भी घेरा वकीलों ने )



वकीलों की हड़ताल 40 दिन से ज्यादा चली। इस दौरान अपनी मांगें पूरी कराने के लिए वकीलों ने भरसक प्रयास किए। रोज धरना-प्रदर्शन किया। दो दिन कचहरी के सामने जाम लगाया। गिरफ्तारी देने के लिए कविनगर थाने का घेराव किया। चार बार पश्चिम यूपी के 22 जिलों की बार एसोसिएशन के साथ बैठक की। 16 नवंबर को दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और यूपी के वकीलों का महासम्मेलन किया। प्रयागराज जाकर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश से मुलाकात की, लेकिन इतना सबकुछ करके भी मांगें पूरी नहीं हो सकीं। इसके बाद जिला जज से मुलाकात की तो हड़ताल खुलने का रास्ता निकल गया।



बिना वकील निपट गए 2,756 केस



( 370 नए केस दर्ज हुए )



वकीलों की हड़ताल का नवंबर में व्यापक असर दिखा। लगभग चार लाख केस में सुनवाई नहीं हो सकी। सिर्फ आगे की तारीख लगी। लेकिन दिसंबर में कहानी में कुछ बदलाव आ गया। न्यायिक अधिकारियों ने सुनवाई शुरू कर दी। बिना वकील के लोग अपनी बात कोर्ट के सामने रखने लगे। एक से आठ दिसंबर के बीच 2, 756 केस निपट गए। इनमें वाहनों के चालान से लेकर जमानत तक के मामले थे। दुष्कर्म जैसे संगीन मामलों में कोर्ट ने सजा भी सुना दी। इतना ही नहीं। लोगों की याचिका पर नए केस भी दर्ज किए गए। 370 नए केस दर्ज हुए थे। मुकदमों में बयान दर्ज कराने और आरोप तय किए जाने के काम भी होने लगे।



छह केस दर्ज हुए वकीलों के खिलाफ

1. पहला केस 29 अक्तूबर को कोर्ट की नाजिर की ओर से दर्ज कराया गया। इसमें पूर्व बार अध्यक्ष नाहर यादव, एडवोकेट अभिषेक यादव, दिनेश यादव नामजद हैं। 40-50 आरोपी अज्ञात हैं। कोर्ट में पथराव, तोड़फोड़ करने और पुलिस चौकी फूंकने का आरोप है।

2. दूसरा केस भी 29 अक्तूबर को ही दर्ज किया गया। यह पुलिस की ओर से दर्ज किया गया था। इसमें सभी 50 आरोपी अज्ञात में हैं। वकीलों पर चौकी में घुसकर तोड़फोड़ करने और सीसीटीवी व डीवीआर को क्षतिग्रस्त करने का आरोप है।

3. तीसरा केस 12 नवंबर को दर्ज कराया गया। इसमें वकीलों पर कचहरी के सामने रास्ता जाम करने का आरोप है। यह केस वहां से गुजर रहे तरुण तोमर की ओर से दर्ज किया गया। आरोप है कि ट्रैफिक जाम लगने से मरीजों की जान खतरे में पड़ गई।

4. चौथा केस प्रताप विहार निवासी दुर्वेश चंद शर्मा की ओर से 12 नवंबर को ही दर्ज कराया गया। दुर्वेश का वकीलों पर आरोप है कि जाम लगाने के दौरान उनके साथ हाथापाई की और उनकी गाड़ी का शीशा पत्थर मारकर तोड़ दिया।

5. पांचवा केस 29 नवंबर सिविल जज के पेशकार संजय कौशिक की ओर से दर्ज कराया गया। इसमें अधिवक्ता अतुल डोभाल नामजद हैं। एक महिला और एक अन्य अज्ञात में हैं। आरोप है कि इन लोगों ने लोकसेवक का अपमान किया और धमकी दी।

6. छठा केस भी 29 नवंबर को दर्ज कराया गया। यह कोर्ट के नाजिर की ओर से लिखा गया। इसमें 44 वकील नामजद हैं। आरोप है कि वकीलों ने कोर्ट में घुसकर हंगामा किया। इससे सरकारी काम में बाधा पहुंची।
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वकीलों की प्रमुख मांगें

जिला जज अनिल कुमार को हटाया जाए।



लाठीचार्ज के दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो।



लाठीचार्ज के लिए एफआईआर दर्ज की जाए।



वकीलों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं।



लाठीचार्ज में घायल वकीलों को आर्थिक मदद मिले।
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