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Ghaziabad News: बीमार उद्योगों में जान फूंकने के लिए उठाए जाएंगे कदम

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गाजियाबाद। औद्योगिक विकास के आड़े आ रही समस्याओं को जानने के लिए शनिवार को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार गाजियाबाद पहुंचे। कलक्ट्रेट स्थित महात्मा गांधी सभागार में उन्होंने उद्यमी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इस दौरान वित्तीय समस्याओं से जूझ रहे बीमार उद्योगों के पुर्नवास के लिए नीति बनाने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। प्रमुख सचिव ने बीमार उद्योगों में जान फूंकने के लिए कदम उठाने का आश्वासन दिया।
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उत्तर प्रदेश उद्यमी विकास संघ के अध्यक्ष उपेंद्र गोयल ने कहा कि गाजियाबाद में ऐसे कई उद्योग हैं जो विलंब से भुगतान, अत्याधिक कर, किसी आकस्मिक दुर्घटना में जानमाल के नुकसान या निर्मित उत्पादों के नष्ट होने से पूरी तरह पटरी से उतर गए हैं। ऐसे बीमार उद्योगों के पुर्नवास के लिए सरकार से नीति बनाने का अनुरोध लगातार किया जा रहा है। प्रमुख सचिव ने कहा कि उद्यमी संगठन तीन सदस्यीय समिति गठित करें, जिनमें बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाए। बीमार उद्योगों के लिए अगर किसी दूसरे राज्य या फिर देश में कोई नीति निर्गत है तो उसका अध्ययन किया जाए। संगठन इसका ड्रॉफ्ट बनाकर दें, जिसे शासन को भेजा जाएगा।
इंड्रस्ट्रियल एरिया मैन्युफेक्चरर एसोसिएशन के महासचिव संजीव सचदेव ने कहा कि अगर कोई उद्यमी अपनी इकाई लगाना चाहे तो उसको जमीन खरीदने पर ही अपनी सारी पूंजी खर्च करनी पड़ जाती है। जब घर खरीदने के लिए होम लोन और वाहन खरीदने के लिए कार लोन दिया जा सकता है तो औद्योगिक भूखंड खरीदने के लिए यह व्यवस्था क्यों नहीं है। उन्होंने नया उद्योग लगाने के लिए विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी होने में आने वाली दिक्कतों से अवगत कराया। प्रमुख सचिव ने कहा कि इस संबंध में वित्तीय संस्थाओं से वार्ता कर कोई विकल्प तलाशने का प्रयास किया जाएगा। यूपीसीडा के औद्योगिक भूखंडों को फ्री होल्ड किए जाने की मांग भी इस दौरान संगठनों ने उठाई।
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इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के चैप्टर चेयरमैन संजय अग्रवाल ने पुरानी इकाइयों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जल एवं वायु सहमति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए एकमुश्त समाधान योजना लाने की मांग उठाई। लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष अमरीष गोयल ने मुरादनगर और मोदीनगर क्षेत्र के पावरलूम बुनकरों की विद्युत संबंधित समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। गाजियाबाद इंडस्ट्रीज फेडरेशन के अध्यक्ष अरुण शर्मा ने कहा कि गैस आधारित जनरेटर पर मिल रहे अनुदान से मध्यम उद्योगों को वंचित रखा गया है। सभी श्रेणियों के उद्योगों को इसका लाभ मिलना चाहिए।
साहिबाबाद ट्रांस हिंडन एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने नगर निगम की ओर से बनाए गए टीएसटीपी से मिलने वाले शोधित पानी की महंगी दरों का मुद्दा उठाया। प्लेज योजना के अंतर्गत मंडोला और लोनी में प्रस्तावित औद्योगिक पार्क की स्थापना के लिए आसुधार शुल्क को कम किए जाने की मांग भी उठाई गई। इस मौके पर जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह, नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक, जीडीए सचिव राजेश कुमार सिंह, आईएएमए के अध्यक्ष सुशील अरोड़ा मौजूद रहे।

सभी औद्योगिक क्षेत्र निगम से वापस लेना यूपीसीडा
औद्योगिक क्षेत्रों की सड़कों, नाले, नालियों और जल निकासी से संबंधित समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। यह मुद्दा प्रमुख सचिव के सामने भी उठाया गया। इस पर नगर आयुक्त ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में औद्योगिक क्षेत्रों से होने वाली कर वसूली के सापेक्ष 60 प्रतिशत से अधिक धनराशि का कार्य कराया जा चुका है। यह धनराशि औद्योगिक क्षेत्रों के लिए पर्याप्त नहीं है। यूपीसीडा के उप महाप्रबंधक आरएस यादव ने बताया कि नगर निगम को हस्तांतरित सभी औद्योगिक क्षेत्र यूपीसीडा में सम्मिलित किए जा रहे हैं। इनमें अवस्थापना संबंधित कार्य कराए जाने के लिए 200 करोड़ रुपये के टेंडर हो चुके हैं।

सात महीने में 4,811 करोड़ का निर्यात
प्रमुख सचिव के समक्ष अधिकारियों ने जनपद की औद्योगिक स्थिति का प्रस्तुतिकरण दिया। बताया गया कि एमएसएमई और मैन्युफेक्चरिंग व सर्विस उद्योग मिलाकर कुल 1,42,748 इकाइयां पंजीकृत हैं। इसमें लगभग 10,22,322 लोगों को रोजगार दिया जा रहा है। जनपद में लगभग 45 वृहद औद्योगिक इकाइयां स्थापित हैं, जिनमें प्रमुख हमदर्द लैबोरेटरी, पार्ले एग्रो, अम्बीका स्टील, टाटा स्टील, बीईएल आदि शामिल हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में जुलाई तक 4,811 करोड़ रुपये का निर्यात जनपद से किया जा चुका है।
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