गाजियाबाद। कुत्तों के टीकाकरण, टीके की कंपनी और बंध्याकरण में होने वाले खर्च के संबंध में आरटीआई से सूचना उपलब्ध नहीं कराने पर नगर निगम को तलब किया है। आयुक्त ने पूछा है कि निगम के कोष से जब इस पर खर्च किया जा रहा है तो इसकी सूचना उपलब्ध कराने में क्या दिक्कत है।
दरअसल, राज्य सूचना आयुक्त ने एक आवेदक की ओर से की गई शिकायत के क्रम में यह टिप्पणी की। आवेदक ने नगर निगम के सूचना अधिकारी से आरटीआई के तहत पूछा था कि कितने कुत्तों का अब तक कितना टीकाकरण, बंध्याकरण किया जा चुका है। टीका कौन सी कंपनी का है। इस पर कुल कितना खर्च किया जा रहा है। आवेदक ने टीकाकरण और बंध्याकरण करने वाले एनजीओ को किए गए भुगतान की भी जानकारी मांगी थी। नगर निगम की ओर से इसमें आवेदक को जवाब भेजा कि टीके की कंपनी की जानकारी उनके पास नहीं है, न ही उनको टीके की कीमत की जानकारी है। निगम ने भुगतान संबंधी जवाब भी नहीं दिया। निगम ने अन्य सवालों के जवाब भी नहीं दिए। निगम ने कहा कि किसी तीसरे पक्ष के आर्थिक हितों को लेकर वह किसी को भी इस तरह की जानकारी नहीं दे सकते। इसके बाद आवेदक ने राज्य सूचना आयुक्त के यहां अपील की। राज्य सूचना आयुक्त ने निगम के जवाब पर सख्त टिप्पणी की।
22.50 हजार कुत्तों के बंध्याकरण और टीकाकरण का काम पूरा हुआ :
नगर निगम ने अक्तूबर 2023 से लेकर अभी तक 22.50 हजार कुत्तों के टीकाकरण और बंध्याकरण का काम पूरा किया है। दावा है कि चार वार्ड में सभी कुत्तों का बंध्याकरण और टीकाकरण पूरा हो चुका है। शेष 96 वार्डों में भी यह अभियान तेजी से चल रहा है। हालांकि, नए आंकड़े के हिसाब से कुत्तों की संख्या 60 हजार से पार हो चुकी है। कुत्ते लगातार सोसायटी, गली मोहल्ले में बच्चों और बड़ों काे अपना शिकार बना रहे हैं।
निगम बोला...पत्र मिलने पर उपलब्ध कराई जाएगी जानकारी :
नगर निगम के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशीष त्रिपाठी ने बताया कि टीकाकरण और बंध्याकरण का काम एनजीओ करता है। वह किस कंपनी से टीका खरीदती है, इसकी जानकारी उनके पास नहीं है। यदि अपीलार्थी पहली अपील करता तो इसकी जानकारी देने के लिए कार्रवाई शुरू की जाएगी। अभी तक आयोग का पत्र नहीं मिला है। यदि कोई पत्र मिलता है तो इसकी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।