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Ghaziabad News: एनओसी में खेल, बहुमंजिला इमारतों में नियम-कानून फेल

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गाजियाबाद। जिले में बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभिन्न इलाकों में एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) जारी करने की प्रक्रिया ही संदेह के घेरे में है। इससे भवन नियमों का पालन कागजों तक सीमित रह गया है।
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फेडरेशन ऑफ एओए गाजियाबाद के संस्थापक आलोक कुमार के मुताबिक, जिले के करीब 40 फीसदी अपार्टमेंट में सेटबैक क्षेत्र पर अवैध कब्जा है। निर्माण के दौरान मानकों का पालन दिखाया जाता है, लेकिन कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिलने के बाद नियमों का उल्लंघन कर अतिरिक्त निर्माण कर लिए जाते हैं। इससे न केवल बिल्डिंग की संरचनात्मक सुरक्षा प्रभावित होती है, बल्कि आग जैसी आपात स्थितियों में खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

हाल ही में गौर ग्रीन एवेन्यू सोसायटी में 29 अप्रैल को लगी आग ने इन खामियों को उजागर कर दिया। अवैध निर्माण के कारण दमकल की गाड़ियां समय पर टावर तक नहीं पहुंच सकीं। इससे राहत कार्य प्रभावित हुआ। यह घटना बताती है कि सेटबैक पर कब्जा सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि सीधे तौर पर लोगों की जान से जुड़ा जोखिम है।
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सेटबैक पर कब्जा, खतरे में सुरक्षा
हकीकत यह है कि सेटबैक जो भवन के चारों ओर आपातकालीन पहुंच के लिए छोड़ा जाता है, उसे दुकानों, कमरों या पार्किंग शेड में बदल दिया गया है। राजनगर एक्सटेंशन और क्रॉसिंग रिपब्लिक जैसे बड़े आवासीय क्षेत्रों में भी कंप्लीशन के बाद खुले स्थानों पर अवैध निर्माण आम बात बन चुकी है।


कागजों में पूरे हो रहे मानक
सबसे बड़ी चिंता जवाबदेही की कमी है। एनओसी जारी करने से लेकर कंप्लीशन सर्टिफिकेट देने तक कई स्तरों पर जांच का प्रावधान है। इसके बावजूद बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। आरोप यह भी है कि कई मामलों में बिना निरीक्षण के ही एनओसी जारी कर दी जाती है। फायर सेफ्टी, पार्किंग व ओपन स्पेस जैसे जरूरी मानकों को कागजों में पूरा दिखा दिया जाता है।


दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई
फेडरेशन ऑफ एओए गाजियाबाद के अध्यक्ष आलोक कुमार के अनुसार, भवन उपविधि में स्पष्ट प्रावधान है कि इमारत की ऊंचाई के साथ सेटबैक की चौड़ाई भी बढ़नी चाहिए, कम से कम छह मीटर और कोने पर नौ मीटर तक। साथ ही हर साल निरीक्षण और हर पांच साल में एनओसी नवीनीकरण अनिवार्य है, लेकिन इन नियमों का भी पालन नहीं हो रहा। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी अधिकारियों व बिल्डरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। स्पष्ट है कि जब तक एनओसी प्रक्रिया में पारदर्शिता, नियमित निरीक्षण और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक शहर की ऊंची इमारतें सुविधाओं का प्रतीक कम और खतरे का कारण ज्यादा बनी रहेंगी।

15 दिन में मांगी रिपोर्ट
इस बीच जीडीए सचिव विवेक कुमार मिश्र ने सभी जोनल प्रभारियों से 15 दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी है और अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है। हालांकि, पहले भी नोटिस जारी कर औपचारिकता निभाने के आरोप लगते रहे हैं, जिससे लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है।

अवैध निर्माण पर रोक लगाने की जिम्मेदारी विकास प्राधिकरण की

सेवानिवृत्त चीफ टाउन प्लानर एससी गौड़ का कहना है कि सोसायटी हैंडओवर होने से पहले बिल्डर और हैंडओवर होने के बाद आरडब्ल्यूए अवैध निर्माण के लिए जिम्मेदार हैं। इसके साथ ही जिस विकास क्षेत्र में इमारत या सोसायटी है, उसके विकास प्राधिकरण की भी जिम्मेदारी है कि वह अपने क्षेत्र में अवैध निर्माण की रोकथाम के लिए निगरानी करे। अगर कोई अवैध निर्माण करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई और ध्वस्तीकरण का अधिकार संबंधित प्राधिकरण को है।
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