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Ghaziabad News: अफसरों की ढिलाई से मुखबिर योजना धराशाई

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रश्मि ओझा
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गाजियाबाद। कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाने के लिए शुरू की गई मुखबिर योजना गाजियाबाद में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की ढिलाई से धराशाई हो गई है। योजना का ठीक से प्रचार-प्रसार न होने की वजह से लिंग भ्रूण परीक्षण पकड़वाने के लिए न तो मुखबिर मिल रहे हैं और न ही अल्ट्रासाउंड सेंटरों की पोल खोलने के लिए मिथ्या ग्राहक। इस योजना में मुखबिर को 60 हजार और मिथ्या ग्राहक ( डिकॉय पेशेंट ) को एक लाख रुपये दिए जाने का प्रावधान है। अफसरों की ढिलाई इसलिए भी साबित हो रही है क्योंकि पास के राज्य हरियाणा की टीम गाजियाबाद में भ्रूण लिंग परीक्षण के 20 से ज्यादा मामले पिछले छह साल में पकड़ चुकी है।

पूर्व गर्भाधान एवं पूर्व प्रसव निदान तकनीक ( पीसी एंड पीएनडीटी) के अंतर्गत मुखबिर योजना 2017 में शुरू की गई थी। उम्मीद थी कि गाजियाबाद में ऐसे अल्ट्रासाउंड सेंटर पर शिकंजा कसेगा जो भ्रूण लिंग परीक्षण करते हैं। इसके लिए लोनी क्षेत्र के कई सेंटर बदनाम रहे हैं। हरियाणा की टीम ने लोनी में कई बार कार्रवाई की है। वहां की टीम को मुखबिर भी मिल रहे हैं और मिथ्या ग्राहक भी। भ्रूण लिंग परीक्षण कराने के लिए हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली से महिलाएं आती हैं। हरयिाणा की टीम के छापों में इसका खुलासा हो चुका है।
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तआज्जुब की बात यह है कि गाजियाबाद स्वास्थ्य विभाग के अफसर ऐसे सेंटरों को नहीं पकड़ पा रहे हैं। मुखबिर योजना में मुखबिर उसे कहा जाता है जो ऐसे अल्ट्रासाउंड सेंटर की सूचना दे जिस पर भ्रूण लिंग परीक्षण किया जा रहा हो। मिथ्या ग्राहक वह गर्भवती महिला होती है जो अल्ट्रासाउंड सेंटर पर अल्ट्रासाउंड कराने के बहाने जाती है और भ्रूण लिंग परीक्षण करने वालों को रंगे हाथ पकड़वाती है। स्वास्थ्य विभाग की टीम मुखबिर और मिथ्या ग्राहक की मदद से भ्रूण लिंग परीक्षण का पर्दाफाश करती है।


एक करोड़ का बजट मिला

नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम ) स्वास्थ्य विभाग को एक करोड़ का बजट मिला है। इसमें से ही मुखबिर योजना पर खर्च किया जाना है। लेकिन न तो मुखबिर मिले हैं और न ही योजना का प्रचार प्रसार ठीक से हुआ है। स्वास्थ्य विभाग ने पिछले तीन साल में किसी भी अल्ट्रासाउंड सेंटर का स्टिंग ऑपरेशन नहीं किया है। ऑपरेशन करके ही लिंग भ्रूण परीक्षण का खुलासा करना है। लोनी के एक अस्पताल में 27 अगस्त 2020 में छापा मारा गया था लेकिन पर्याप्त साक्ष्य न होने से केस दर्ज नहीं कराया गया था।

जिले में हैं 354 अल्ट्रासाउंड सेंटर

गाजियाबाद में कुल 354 अल्ट्रासाउंड सेंटर पंजीकृत हैं। इसके अलावा खोड़ा, लोनी, डासना, मसूरी, मोदीनगर और मुरादनगर में बगैर पंजीकरण के सेंटर चल रहे हैं। ऐसे कई सेंटर सील किए जा चुके हैं। कई सेंटरों पर भ्रूण लिंग परीक्षण हरियाणा की टीम ने पकड़ा है।
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हरियाणा पुलिस की कार्रवाई


- 11 जनवरी 2021: फरीदाबाद की टीम ने मसूरी में छापा मारा।
- 05 जनवरी 2021 कविनगर के रजापुर में एक को किया गिरफ्तार।
- 12 नवंबर 2020 : लोनी में हरियाणा पुलिस ने छापा मारकर लैब सील की।
- 27 अगस्त 2020 : लोनी में अल्ट्रासाउंड सेंटर पर छापा।
-19 सितंबर को 2020 : लोनी में भ्रूण लिंग परीक्षण का खुलासा।
- 26 दिसंबर को 2020 को : लोनी में भ्रूण लिंग परीक्षण से पर्दा उठा।

- 22 अगस्त 2019 : रोहतक की टीम ने छापा मारकर एक को किया गिरफ्तार।

- 02 सितंबर 2019 : झज्जर की टीम ने मोहननगर में छापा मारकर लिंग भ्रूण परीक्षण का किया खुलासा।
- 11 मई 2016 : रेवाड़ी की टीम ने साहिबाबाद अल्ट्रासाउंड सेंटर पर मारा छापा।
- 26 जून 2017 : सोनीपत की टीम ने लोनी में छापा मारकर सेंटर पर लगाई सील।

- 11 दिसंबर 2018 : सोनीपत की टीम ने राजनगर में भ्रूण लिंग परीक्षण का किया खुलासा।



मुखबिर नहीं मिले
लिंग भ्रूण परीक्षण की सूचना मिलने पर मिथ्या ग्राहक का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन तो कोई सूचना मिली है और न ही कोई मिथ्या ग्राहक बनने के लिए आगे आया है। - डॉ. भवतोष शंखधार, सीएमओ
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