गाजियाबाद। कूड़ा निस्तारण के लिए पांच करोड़ रुपये की लागत से सिद्धार्थ विहार में बनाया गया प्लांट शो पीस बनकर रह गया है। महापौर और पार्षदों ने फीता काटकर प्लांट का उद्घाटन किया और अगले ही दिन प्लांट बंद हो गया। पांच करोड़ का यह प्लांट अब सरकारी सिस्टम को ‘मुंह चिढ़ा’ रहा है।
नगर निगम ने इस प्लांट को तैयार करने के लिए जल निगम की सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शंस एंड डिजाइन सर्विसेज) यूनिट को जिम्मेदारी दी थी। करीब एक साल की देरी से 9 नवंबर 2016 को महापौर अशु वर्मा और पार्षदों ने इस प्लांट का लोकार्पण किया।
दावा किया गया था कि प्रतिदिन इस प्लांट से 300 टन कचरे का निस्तारण किया जाएगा। आधुनिक मशीनों के जरिए ईंट-पत्थर, कांच आदि अलग किए जाएंगे, दूसरे चरण में कूड़े को मिटिगेशन किया जाएगा और तीसरे चरण में वह खाद के रूप में बाहर आएगा। इस खाद को नगर निगम अपने पार्कों में इस्तेमाल कर सकेगा या इसे बेचकर आमदनी की जा सकती है। लेकिन लोकार्पण के साढ़े छह महीने बाद भी यह प्लांट वर्किंग में नहीं आ सका है।
प्लांट टेकओवर से निगम का इंकार
अनुबंध की शर्तों के मुताबिक प्लांट तैयार कर ट्रायल बेस पर सीएंडडीएस को ही कुछ महीनों तक संचालित करना था। प्लांट चालू तो हुआ नहीं, लेकिन सीएंडडीएस ने नगर निगम को यह प्लांट हैंडओवर करने का प्रपोजल तैयार कर दिया। इस पर नगरायुक्त ने प्लांट टेकओवर करने से इंकार कर दिया।
अधिकारी बोले
सीएंडडीएस को नोटिस जारी किया गया है। बंद हालत में प्लांट को टेकओवर नहीं करेंगे। अपने स्तर पर कमेटी गठित कर प्लांट का निरीक्षण कराया गया था, इसमें कई खामियां मिलीं।
- अब्दुल समद, नगरायुक्त