साहिबााबद। आवास विकास परिषद में काम के बदले पैसे मांगने का ऑडियो-वीडियो पहले भी वायरल हो चुका है। पूर्व उप-आवास आयुक्त से लेकर दो संपत्ति प्रबंधक और पांच अभियंताओं पर इस तरह के आरोप लगे हैं।
गत वर्ष आवास विकास परिषद वसुंधरा के संपत्ति प्रबंधक नृपेंद्र बहादुर सिंह का काम के बदले रिश्वत मांगने का ऑडियो वायरल हुआ था। नृपेंद्र बहादुर से पूर्व संपत्ति प्रबंधक आनंद गौतम का भी काम के बदले पैसे मांगने का वीडियो वायरल हुआ था।
ऑडियो-वीडियो वायरल होने के बाद उप आवास आयुक्त की जांच रिपोर्ट के आधार पर मुख्यालय द्वारा दोनों को ही तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था। यही नहीं जनवरी 2024 में सिद्धार्थ विहार योजना में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की करीब 12 एकड़ जमीन को निजी कंपनी को बेहद कम दाम पर बेचने का मामला भी खुला था।
इस मामले में तो पूर्व उप आवास आयुक्त एसवी सिंह और पांच अभियंताओं पर साढ़े 300 करोड़ के घोटाले और अनुचित लाभ लेने के तहत मुकदमा चलाने की संस्तुति की थी। इस मामले में भी कई निलंबन हो चुके हैं, जबकि इसमें संलिप्त कई अधिकारी सेवानिवृत्त भी हो चुके थे। ऐसे ही वर्ष 2023 में वसुंधरा सेक्टर-1 में अधिकारियों की मिलीभगत और कथित रिश्वतखोरी के चलते सिर्फ तीन फ्लैटों के नक्शे की जगह 23 अवैध फ्लैटों का निर्माण कराया गया था, इस मामले में भी जांच बैठी थी। ऐसे ही अप्रैल 2022 में संपत्ति आवंटन विभाग के स्थानीय कर्मियों की मिलीभगत से जालसाजों द्वारा गाजियाबाद की 13 प्रमुख संपत्तियों का फर्जी तरीके से आवंटन कराने का खेल पकड़ा गया था, जिसके बाद विभाग ने कड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए इन संपत्तियों के आवंटन को रद्द कर राशि को जब्त कर लिया।