गाजियाबाद। चाइनीज सामान न खरीदने की कतार में अब नगर निगम भी शामिल हो गया है। शहर की 60 हजार स्ट्रीट लाइटों को बदलकर एलईडी लाइटें लगाने की प्रक्रिया में निगम ने कांट्रेक्टरों के लिए बड़ी शर्त लगा दी है। शर्त के मुताबिक नगर निगम चीन की बनी स्मार्ट एलईडी लाइटें नहीं खरीदेगा।
एलईडी लाइटें बदलने वाली फर्म पर देश में उत्पादन करने का लाइसेंस होना अनिवार्य होगा। हालांकि लाइटों में जापान की एक कंपनी समेत कुछ कंपनियों की अत्याधुनिक तकनीक वाली चिप के इस्तेमाल की अनिवार्यता की शर्त भी लगा दी है।
नगर निगम पुरानी और ज्यादा बिजली खपत वाली सोडियम लाइटों को हटाकर एलईडी लाइटें लगाने की योजना पर काम कर रहा है। निगम ने टेंडर कॉल किए हैं। 5 दिसंबर को कंपनियां टेंडर डालेंगी।
निगम ने पहले भी कई शर्तें तय की थीं, लेकिन अब महापौर अशु वर्मा ने कुछ और शर्तें लगाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने नगर आयुक्त को शर्तों का ब्योरा भी भेजा है। नई शर्तों के मुताबिक टेंडर में भाग लेने वाली कंपनियों के पास देश में उत्पादन करने की सुविधा होनी चाहिए, ताकि चाइना की मुहर लगा सामान निगम में न पहुंच सके।
एनर्जी एफिशिएंशी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) से अधिकृत जापान की नीचिया कंपनी समेत चार कंपनियों की चिप लाइटों में लगी होनी चाहिए। यह चिप लाइटों की गुणवत्ता को बढ़ाती है।
टेंडर में भाग लेने वाली फर्म के पास एक वित्तीय वर्ष में 30 हजार स्मार्ट एलईडी लगाने का अनुभव हो। उसके पास केंद्र सरकार से स्वीकृत एलईडी लाइट जांच के लिए लैब होनी चाहिए। लाइटें भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) से स्वीकृत हों। उनका कहना है कि शर्तों की सूची नगर आयुक्त के पास भेज दी गई है। इन्हें टेंडर की शर्तों में शामिल किया जाएगा।
मुख्य मार्गों पर कोहरे के लिए भी लगेंगी लाइटें
एलईडी लाइटों की रोशनी कोहरे को नहीं काट पाती, बल्कि उसे और गहरा कर देती है। सोडियम लाइटों में कोहरे को काटने की क्षमता है। ऐसे में नगर निगम ने कांट्रेक्टर फर्म के लिए मुख्य मार्गों और हाईवे पर कोहरे के लिए उपयुक्त पीली रोशनी की व्यवस्था करने की भी शर्त लगाई है। ताकि सड़क दुर्घटनाओं से बचा जा सके।