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सुल्लामल रामलीला में ही होता है सीता विदाई का सजीव मंचन

Sat, 17 Sep 2016 12:06 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
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अन्य - फोटो : अमर उजाला
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प्राचीन सुल्लामल रामलीला में कई ऐसी अनोखी परंपराएं हैं जो सिर्फ इसी रामलीला में ही निभाई जाती हैं। ऐसा ही एक सजीव मंचन सीता की विदाई का है। अन्य रामलीलाओं में जहां स्टेज पर ही सीता विदाई का मंचन किया जाता है, वहीं सुल्लामल रामलीला में होने वाले इस मंचन में कमेटी के पदाधिकारी ही सीता की डोली उठाते हैं।
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इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं विदाई गीत गाती हैं। डोली बाजार से गुजरती है तो महिलाएं बेटी स्वरूप सीता को साड़ी, जेवर और अन्य उपहार गिफ्ट देती हैं। कमेटी के महामंत्री मनोज गोयल ने बताया कि सुल्लामल रामलीला में वास्तविक रूप से सीता विदाई का आयोजन किया जाता है।

रामलीला मंचन की शुरूआत से ही सीता विदाई समारोह का आयोजन किया जाता है। इसमें श्रीराम जी की तरफ से वर पक्ष के लोग और सीताजी की तरफ से वधू पक्ष की महिलाएं शामिल होती हैं।
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ठाकुरद्वारा मंदिर से सीताजी की डोली उठती है, जिसमें महिलाएं विदाई गीत गाती हैं। इसके अलावा बैंड वाले भी विदाई की ही धुन बजाते हैं। सीता विदाई का यह मंचन इस कदर सजीव लगता है कि मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो जाती हैं।

ठाकुरद्वारा मंदिर से चौपले मंदिर तक सीताजी की डोली को कमेटी के पदाधिकारी कंधा देकर चलते थे। रास्ते भर बेटी की विदाई की तरह महिलाएं दुल्हन सीताजी को गहने, कपड़े और अन्य उपहार भी देती हैं। महामंत्री ने बताया कि विदाई समारोह की परंपरा अभी भी वही है, हालांकि अब महिलाओं की संख्या में कुछ कमी आ गई है।

राम बारात भी होती है कुछ खास
 ठीक ऐसे ही सुल्लामल रामलीला कमेटी की राम बारात देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। इनमें बड़ी संख्या में झांकियां होती हैं। राम बारात वाले दिन स्टेज पर कोई मंचन नहीं होता। प्रभु राम की बारात ठाकुरद्वारा से शुरू होकर शहर के विभिन्न मार्गों और प्रमुख बाजारों से होते हुए कई घंटों में रामलीला मैदान तक पहुंचती है।

पक्का तालाब पर होता था राम केवट संवाद का मंचन:
रामलीला मंचन की शुरूआत में पक्का तालाब पर राम केवट संवाद का मंचन होता था। जहां सचमुच के तालाब में केवट नाव से श्रीराम सीता और लक्ष्मण जी को पार कराते थे। बाद में भी कई वर्षों तक पक्के तालाब पर ही मंचन होता था। बताया जाता है कि एक बार नाव पलटने की दुर्घटना के बाद वहां मंचन बंद हो गया।
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