गाजियाबाद। एनएच-नौ से सटी 30 साल पुरानी शिवपुरी कॉलोनी आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रही है। करीब 15 हजार की आबादी वाले इस इलाके में अंदरूनी सड़कें छह साल से बदहाल हैं। कहीं इंटरलॉकिंग उखड़ी है तो कहीं सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। बिजली के खंभे मकानों के छज्जों से सट रहे हैं और गलियों में तारों का मकड़जाल लोगों के लिए खतरा बना हुआ है।
बृहस्पतिवार को अमर उजाला की टीम ने शिवपुरी कॉलोनी में पहुंचकर लोगों से उनकी समस्याएं जानीं। लोगों ने बताया कि करीब तीन दशक पहले निजी कॉलोनाइजर और स्थानीय किसानों ने यहां प्लॉट काटे थे। एनएच-नौ के किनारे होने के कारण कॉलोनी तेजी से विकसित हुई, लेकिन अनियोजित तरीके से हुए विकास में मानकों का ध्यान नहीं रखा गया। इसका खामियाजा अब यहां रहने वाले लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
नगर निगम के वार्ड-58 में आने वाली कॉलोनी का विस्तार लेबर चौक से राठी मिल तक है। एक ओर एनएच-नौ और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, जबकि दूसरी ओर विजयनगर सेक्टर-नौ है। आसपास आवास विकास व जीडीए की योजनाएं हैं और इनके बीच शिवपुरी कॉलोनी बसी है। कॉलोनी की बाहरी सीमा पर दुकानें हैं और सप्ताह के सभी दिन यहां बाजार लगता है। कॉलोनी में दो शिव मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर और एक इंटर कॉलेज भी है।
छह साल से नहीं हुआ कोई बड़ा निर्माण
स्थानीय लोगों के मुताबिक, छह साल से सड़कों की मरम्मत या निर्माण का कोई बड़ा काम नहीं हुआ है। कई लोगों ने अपने घरों के छज्जे और रैंप सड़क तक बढ़ा लिए हैं। इससे करीब 10 फीट चौड़ा रास्ता कई जगह सात-आठ फीट तक सिमट गया है।
बारिश में गलियां बन जाती हैं जलमग्न
कॉलोनी में नियमित सफाई नहीं होने से जगह-जगह गंदगी रहती है। बारिश के दौरान गलियों में जलभराव हो जाता है। खुले नालों और टूटी सड़कों के कारण लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है। इसके अलावा शुद्ध पेयजल की समस्या भी बनी हुई है। लोगों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
सार्वजनिक शौचालय तक नहीं
कॉलोनी की मुख्य सड़क पर रोजाना बाजार लगता है। दुकानदारों और खरीदारी करने आने वाले लोगों के लिए सार्वजनिक शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है। लोगों का कहना है कि शौचालय जाने के लिए कई किलोमीटर दूर राठी मिल की तरफ जाना पड़ता है।
लोगों की जुबानी
कॉलोनी की मुख्य रोड पर दुकानें लगती हैं। ग्राहकों और दुकानदारों को शौच आने पर कई किलोमीटर दूर राठी मिल की तरफ जाना पड़ता है। सार्वजनिक शौचालय नहीं होने से काफी दिक्कत होती है।
-प्रदीप कुमार
बिजली का खंभा टूट गया था। उसे जोड़कर मकान के छज्जे से सटा दिया गया है। इससे कभी भी हादसा हो सकता है। इसके अलावा जगह-जगह गलियों में तारों का मकड़जाल लगा है। कई बार शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं हुई।
-सविता
लोगों ने अपने घरों के छज्जे और रैंप सड़क तक बढ़ा लिए हैं। इससे 10 फुट का रास्ता सात-आठ फुट में सिमट गया है। जगह-जगह इंटरलॉकिंग उखड़ी हुई है। छह साल से कोई काम नहीं हुआ। नालियां खुली हैं और सड़कों में गड्ढे हो गए हैं। लोग गिरते रहते हैं।
-नानक पाल
जगह-जगह गंदगी रहती है। नियमित सफाई नहीं होती। बारिश में गलियों में जलभराव हो जाता है, जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। शुद्ध पेयजल की समस्या भी बनी हुई है।
-रोहित द्विवेदी