सभी मंदिरों में शनिवार को कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र की शुरुआत हुई। पहले दिन माता के शैलपुत्री रूप की पूजा की गई। शनिवार की सुबह से देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ रही। माता को चुनरी और नारियल चढ़ाकर भक्तों ने मनोकामना पूर्ति की कामना की।
गुफा वाले मंदिर में सुबह सात बजे के बाद कलश स्थापना हुई। पूजा-अर्चना के बाद शाम को माता की आरती और भजन कीर्तन किए गए। डासना देवी मंदिर में भी कलश स्थापना के बाद बगलामुखी यज्ञ किया गया। माता का विशेष शृंगार किया गया और मंत्रोचार के साथ विधिवत पूजा की गई।
शाम को भजन मंडली ने माता के भजन गाए। महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने बताया कि नवरात्र के नौ दिनों तक अखंड बगलामुखी यज्ञ होगा। दिल्ली गेट देवी मंदिर में सुबह कलश स्थापना के साथ ही अखंड शतचंडी यज्ञ किया गया।
नौ ब्राह्मणों ने दुर्गा सप्तशती का नौ बार पाठ किया और यज्ञ हुआ। मोरटा स्थित मनन धाम मंदिर में सुबह कलश स्थापना हुई और विशेष पूजा अर्चना की गई। शाम को मां चिंतापूर्णी सेवा मंडल के भजन गायकों ने माता का गुणगान किया।
इसके अलावा नेहरूनगर शिव मंदिर, दूधेश्वरनाथ मंदिर, स्वयंभू शिव मंदिर में भक्तों ने पूजा-अर्चना की। पंडित दुलीदत्त कौशिक ने बताया कि 2 अक्टूबर को भी माता के शैलपुत्री स्वरूप की ही पूजा होगी।