गढ़मुक्तेश्वर। जवाहर गंज मंडी में मंगलवार को धान से लदे ट्रकों के बीच एसडीएम की कार फंस गई। कुछ देर इंतजार के बाद एसडीएम श्रीराम यादव ने सड़क पर खड़े लोडिंग वाहनों को कार्रवाई के लिए कोतवाली भेजने के निर्देश दिए। इस पर मंडी के व्यापारी भड़क गए और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। करीब आधे घंटे तक हंगामा चलता रहा। व्यापारियों ने इसे उत्पीड़न बताया।
धान व्यापारी विशाल सिंघल ने बताया कि पुरानी जवाहर गंज मंडी में क्षेत्र के सभी धान आढ़तियों का कारोबार संचालित होता है। किसान अपनी फसल लेकर मंडी पहुंचते हैं। खरीद-फरोख्त के दौरान ट्रकों का कुछ समय के लिए प्रतिष्ठानों के सामने खड़ा होना स्वाभाविक है। इसी दौरान एसडीएम की कार वहां से गुजर रही थी लेकिन ट्रकों की वजह से रास्ता अवरुद्ध हो गया।
व्यापारियों का कहना है कि प्रशासन को कार्रवाई करने के बजाय समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए। उनका आरोप है कि राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे स्थित उपकृषि मंडी में पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिसके कारण पुरानी मंडी में ही कारोबार संचालित करना मजबूरी बन गया है। ऐसे में वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी देना व्यापारियों का उत्पीडऩ है।
व्यापारियों ने कहा कि मंडी समिति को हर वर्ष सात करोड़ रुपये से अधिक का टैक्स दिया जाता है। इसके बावजूद मंडी में आवश्यक सुविधाएं और पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं कराया गया है। उन्होंने प्रशासन से व्यापार प्रभावित करने वाली कार्रवाई के बजाय वैकल्पिक व्यवस्था और मंडी के विस्तार की मांग की। इस बीच मंडी व्यापारियों ने आधा घंटे तक प्रशासन पर मनमानी का आरोप लगाते हुए हंगामा भी किया।
इस मौके पर रामौतार प्रधान, अमित यादव, विशाल सिंघल, निखिल अग्रवाल, पंकज गर्ग, मूलचंद गर्ग, पुनीत अग्रवाल, सुरेंद्र अग्रवाल, कवि अग्रवाल, विनीत अग्रवाल, आदेश चौहान, सतीश शर्मा, शशांक सिंघल, संदीप अग्रवाल आदि व्यापारी मौजूद रहे।
एसडीएम श्रीराम यादव का कहना है कि सडक़ों पर वाहन खड़ा करने को लेकर कार्रवाई के लिए चेताया था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। व्यापार से कोई परेशानी नहीं है लेकिन रास्ता बाधित नहीं होना चाहिए।