गाजियाबाद। कोरोना काल की 15 फीसदी फीस वापस और समायोजित करने के हाईकोर्ट के आदेश के तीन माह बाद जिला प्रशासन सख्त हुआ है। मामले में माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों को 28 अप्रैल तक स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों को फीस वापस करने और बाकी की फीस समायोजित करने के आदेश दिए हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की ओर से पब्लिक स्कूलों को प्रारूप जारी कर सत्र 2020-21 में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या और सत्र 2022-23 में स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या का ब्योरा मांगा गया है।
साथ ही शासनादेश के तहत वर्तमान सत्र में अब तक कितने विद्यार्थियों की 15 फीसदी फीस समायोजित की गई है और स्कूल छोड़कर जाने वाले छात्र-छात्राओं को अब तक कितनी धनराशि जारी की गई है, इसकी पूरी जानकारी 28 अप्रैल तक देने को कहा है। इससे पहले विभाग की ओर से स्कूलों को 17 फरवरी को आदेश जारी कर हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने को कहा गया था। अधिकांश स्कूलों के फीस वापस और समायोजित नहीं करने से अभिभावकों व पैरेंट्स एसोसिएशन का आक्रोश बढ़ता जा रहा था।
स्कूलों के साथ गूगल मीट पर की बैठक
हाईकोर्ट के आदेश पर जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार श्रीवास ने पब्लिक स्कूलों की बीते मंगलवार को गूगल मीट के जरिए बैठक ली। बैठक में जनपद के 87 पब्लिक स्कूलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में स्कूलों ने मामले में जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया। गूगल मीट का असर रहा कि बैठक के अगले दिन बुधवार को रायन इंटरनेशनल स्कूल और छबीलदास पब्लिक स्कूल की ओर से कुछ अभिभावकों को 15 फीसदी फीस वापस कर दी गई। ऐसे में अन्य स्कूल भी फीस वापस करने और समायोजित करने की तैयारी कर रहे हैं।
पैरेंट्स एसोसिएशन ने नहीं बुलाने का लगाया आरोप
शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों की गूगल मीट के जरिए रखी गई बैठक में नहीं बुलाने पर पैरेंट्स एसोसिएशन ने कड़ी नाराजगी जताई है। गाजियाबाद पैरेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष सीमा त्यागी का कहना है कि अभिभावकों का प्रतिनिधित्व करने वाली पैरेंट्स एसोसिएशन को जानबूझ कर बैठक में शामिल नहीं किया गया। आदेश के पालन तक उनका विरोध जारी रहेगा।
डीएफआरसी की बैठक में की जाएगी समीक्षा
जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार श्रीवास का कहना है कि स्कूलों में फीस वापसी और समायोजन के साथ प्रारूप में सूचनाएं देने के लिए 28 अप्रैल तक का मौका दिया गया है। इसके बाद जिला फीस रेगुलेशन कमेटी (डीएफआरसी) की बैठक में मामले की समीक्षा की जाएगी। आदेश न मानने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सीबीएसई को मान्यता वापसी की संस्तुति का निर्णय लिया जाएगा।