कार्टून कैरेक्टर बन रहे स्कूल और पैरेंट्स का सिर दर्द, स्कूल कर रहे हैं बैन
गाजियाबाद (शोभित शर्मा)। बच्चों के पसंदीदा कार्टून्स को स्कूल बैन कर रहे हैं। इसके लिए अभिभावकों को भी अलर्ट किया जा रहा है। स्कूलों का कहना है कि कार्टून को देखकर बच्चे बड़ों को जवाब देना, जिद करना और उनकी नकल करते हुए बात करना सीख रहे हैं। कई स्कूल अभिभावकाें को मोबाइल पर मैसेज भेजकर और बच्चों की नोटबुक में लिखकर शिनचेन को घर में बैन करने के लिए कह रहे हैं।
कार्टून्स केवल स्कूलों का ही नहीं बल्कि अभिभावकों का भी चैन लूट चुका है। आलम यह है कि कई घरों में बच्चे इस कार्टून को घंटों बैठकर लगातार देखते रहते हैं। अभिभावकों का कहना है कि कार्टून की भाषा बेहद गलत है। बच्चे घर में और स्कूलों में उसी भाषा में बात करते हैं। इस तरह की भाषा का बच्चों पर नकारात्मक असर भी पड़ रहा है और बच्चों के व्यवहार में भी बदलाव आ रहा है। इसको लेकर चिंतित कुछ स्कूलों ने अभिभावकों से साफ मना किया है कि इस कार्टून को बच्चों को न दिखाया जाए।
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स्कूल फेडरेशन ने भी जारी की है एडवाइजरी
इंडिपेंडेंट स्कूल्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की गाजियाबाद इकाई ने शिनचेन सहित कुछ और कार्टून कैरेक्टर को बैन करने के लिए एडवाइजरी जारी की है। फेडरेशन से संबद्ध करीब 120 स्कूलों में यह कहा गया है कि अभिभावक इस तरह के कार्टून कैरेक्टर को से बच्चों से दूर रखें। अध्यक्ष सुभाष जैन ने बताया कि बच्चों के पसंदीदा कार्टून कैरेक्टर को लेकर कई बार अभिभावक भी स्कूल में शिकायत करते हैं। इसके अलावा स्कूल में शिक्षकों ने बच्चों की भाषा को देखते हुए इसे बैन करने की सलाह दी है।
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क्या है परेशानी :
पूरे दिन कार्टून चैनल पर दिखाए जाने वाले कार्टून कैरेक्टर्स की भाषा में बच्चे बात करने लगे हैं। जिनमें शिक्षकों और अभिभावकों के लिए अपमानजनक भाषा भी शामिल रहती है। इसके अलावा शरारतों के साथ उनकी जिद भी बच्चों में बदलाव लाने का काम कर रही है। इन कार्टून कैरेक्टर को कई देशों में पहले ही बैन किया गया है।
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क्या कहते हैं अभिभावक
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बच्चों में कार्टून देखने से किसी की बात न मानना, अपनी मर्जी से पढ़ना जैसे बदलाव आ रहे हैं। बच्चों के स्कूल से भी इसे दिखाने के लिए मनाही की गई है।
सीमा तिवारी, अभिभावक
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पहले सप्ताह में एक ही दिन कार्टून आते थे लेकिन अब कई चैनलों में पूरे दिन कार्टून दिखाए जाते हैं। मैं अपने घर में कार्टून चैनल नहीं लगाती हूं।
डिंपल सहानी, अभिभावक
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स्कूल से ही नोटबुक पर लिखकर दिया गया है कि कार्टून बच्चों को न दिखाएं। यह बच्चों के मस्तिष्क पर बुरा असर डाल रहे हैं।
रुचि गुप्ता, अभिभावक
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कार्टून कैरेक्टर बच्चों को प्रेरणा देने वाले होने चाहिए जबकि चैनल्स ट्रेंड बदलते हुए गलत भाषा के साथ कार्टून कैरेक्टर बना रहे हैं।
शैली सेठी, अभिभावक
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क्या कहते हैं मनोचिकित्सक
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वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. संजीव त्यागी का कहना है कि एक बार की सुनने की चीज को नजरअंदाज किया जा सकता है लेकिन जो हम देख रहे हैं, उसे नजरअंदाज करना मुश्किल है। कई कार्टून कैरेक्टर बहुत शरारती हैं और सभी को परेशान करते हैं। बच्चाें को उसकी शैतानी पसंद है और बच्चे वही करने की कोशिश भी करते हैं। बच्चे कार्टून कैरेक्टर को रोल मॉडल मानकर वैसा ही करने लगते हैं। इससे बच्चों के व्यवहार में बदलाव आता है। डबिंग सही भाषा में की जाए तो काफी हद तक यह सुधर सकती है। ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि बच्चा अगर अपना पसंदीदा कार्टून देख रहा है तो उसे देखने दें लेकिन उसे समझाएं कि ये जो कर रहा है, वो कितना गलत है। कार्टून कैरेक्टर को अपना काम करने दें और अभिभावक अपना काम करें। बच्चों को सही शिक्षा चैनल नहीं अभिभावक ही दे सकते हैं।