गाजियाबाद। देश के 500 शहरों में चल रहे स्वच्छता सर्वेक्षण में जनता की ‘हां’ गाजियाबाद के नंबर बढ़ा सकती है। क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया की टीम फोन पर शहर के किसी भी नागरिक से फीड बैक ले सकती है। ऐसे में लोगों ने जवाब नकारात्मक दिए तो स्वच्छता की दौड़ में शहर पिछड़ सकता है।
सर्वेक्षण के तहत स्वच्छता के विभिन्न मानकों पर शहरों को परखा जाएगा और उसके आधार पर रैंकिंग तय की जाएगी। 2000 अंकों की इस परीक्षा में 45 फीसदी अंक डॉक्यूमेंटेशन के होंगे। यानी नगर निगम ने स्वच्छता के क्षेत्र में अभी तक जो योजनाएं लागू की है उनके दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे।
30 फीसदी यानी 600 अंक सिटीजन फीड बैक के होंगे। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के पास बड़ी संख्या में लोगों के नंबर पहुंच चुके हैं। निगम अधिकारियों ने बताया कि क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया की टीम फोन करके लोगों से छह सवाल पूछेगी।
इनमें अलग-अलग जवाब के लिए अलग अंक निर्धारित हैं। लोगों ने सवालों के जवाब नकारात्मक दिए तो अंक नेगेटिव (माइनस में) मिलेंगे। इसकी वजह से स्वच्छता सर्वेक्षण में गाजियाबाद बीते साल की तरह पिछड़ सकता है।
इन मानकों पर परखा जाएगा शहर
डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, पब्लिक और कम्युनिटी टॉयलेट्स की उपलब्धता, खुले में शौच मुक्त शहर बनाने के लिए किए प्रयास, कूड़ा कलेक्शन सेंटर से कचरा उठाने की फ्रीक्वेंसी, डस्टबिन्स की उपलब्धता
80 ‘स्वच्छाग्रही’ को निगम अफसरों ने दी ट्रेनिंग
नगर निगम ने शहर के सभी 80 वार्डों में स्वच्छ भारत मिशन को सफल बनाने के लिए 80 ‘स्वच्छाग्रही’ नियुक्त किए हैं। बृहस्पतिवार को नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.आरके यादव, अपर नगर आयुक्त डीके सिन्हा और स्वच्छ भारत मिशन के लिए काम करने वाली कंसलटेंट फर्म के एक्सपर्ट ने उन्हें ट्रेनिंग दी।
अपर नगर आयुक्त ने कहा कि शहर के सभी 80 वार्डों को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए प्रयास करना है। स्वच्छाग्रही लोगों को जागरूक करेंगे। यही नहीं क्षेत्र में सार्वजनिक, सामुदायिक टॉयलेट्स की आवश्यक्ता से निगम को अवगत कराएंगे। स्वच्छ भारत मिशन की गाइड लाइन के मुताबिक काम करेंगे।