गाजियाबाद को विकास के पथ पर दौड़ाने में आरडब्ल्यूए का भी बड़ा योगदान है। ऐसी कितनी ही समस्याएं हैं, जो आरडब्ल्यूए और अफसरों ने मिलकर निपटाई हैं। लेकिन इस सबके बावजूद कई मामलों में रेजिडेंट्स को अपना हक लेने के लिए कोर्ट का दरवाजा तक खटखटाना पड़ा।
आरडब्ल्यूए का कहना है कि कुछ अफसरों के गैरजिम्मेदाराना रवैये से ऐसी नौबत आती है। लेकिन इस साल लोगों को उम्मीद है कि अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा से करेंगे।
1. अपार्टमेंट एक्ट और अर्बन डेवलपमेंट एक्ट का होगा इंप्लीमेंट
टीएचए में काफी संख्या में हाईराइज सोसायटियां हैं। बिल्डरों की मनमानी से सोसायटी में रहने वाले लोग परेशान हैं। आरडब्ल्यूए की मांग पर यूपी अपार्टमेंट एक्ट और अर्बन डेवलपमेंट एक्ट लागू तो हो गए हैं लेकिन इनका इंप्लीमेंट सही से नहीं हो रहा है। आरडब्ल्यूए को मजबूरन कोर्ट का सहारा लेना पड़ रहा है। दोनों एक्ट का इंप्लीमेंट होने से कानून के तहत काम होगा। इसकी सबसे ज्यादा आवश्यकता है। उम्मीद है कि नए वर्ष दोनों एक्ट लागू हो जाएंगे और दिक्कतें कम होंगी।
2. समस्या निस्तारण के लिए समय सीमा होगी निर्धारित
टीएचए की सोसायटियों और कालोनियों में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। जीडीए और नगर निगम समस्या निस्तारण का आश्वासन देते हैं। कई बार तो काम भी शुरू हो जाता है लेकिन समय पर नहीं पूरा होता है।
आरडब्ल्यूए की मांग है कि समस्या निस्तारण के लिए एक समय सीमा निर्धारित हो। काम शुरू होने के दौरान ही काम कितने समय पर पूरा होगा, इसकी जानकारी भी दी जाए। आरडब्ल्यूए को विभागों से अपेक्षा है कि शिकायत के बाद निर्धारित समय के अंदर समस्या दूर होगी।
3. जिले में स्टेट काउंसिल की ब्रांच खुलनी चाहिए
2005 में आरटीआई की शुरुआत हुई। वर्षों से समस्या से जूझ रही जनता आरटीआई के जरिए अपनी समस्याओं के निस्तारण के लिए कदम उठा रही है, लेकिन सरकारी विभाग के अधिकारी आरटीआई के अपेक्षित जवाब नहीं देते हैं।
लोगों को लखनऊ स्थित स्टेट काउंसिल के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इससे बचने के लिए जिले में स्टेट काउंसिल के अधिकारी को बैठना चाहिए, जिससे आरटीआई का सही से उपयोग हो। ऐसा होने पर लोगों को आरटीआई का जवाब तय समय में मिलेगा और अपील भी की जा सकेगी।
4. प्रदूषण से मिलेगी लोगों को निजात
बढ़ते प्रदूषण स्तर को देखते हुए आरडब्ल्यूए ने एनजीटी में याचिका डाली हुई है। आरडब्ल्यूए की तरफ से एनसीआर में भी डीजल बसों की जगह सीएनजी बसों के संचालन पर जोर देेने की मांग की गई है।
इसके तहत ही एनजीटी ने एनसीआर के परिवहन निगम से सीएनजी बसों का संचालन करने के लिए रिपोर्ट मांगी है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही सीएनजी बसों का संचालन एनसीआर में होगा। लोगों को प्रदूषण से निजात मिलेगी। शहर में सीएनजी बसें चलीं तो काफी हद तक प्रदूषण कम हो जाएगा।
6. अस्पताल और इंटर कॉलेज की मांग होगी पूरी
टीएचए में एक भी सरकारी अस्पताल और इंटर कॉलेज नहीं है। लोगों को दिल्ली गाजियाबाद के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। आरडब्ल्यूए और सामाजिक संस्थान काफी समय से सरकारी अस्पताल और इंटर कॉलेज की मांग कर रहे हैं।
इसके बाद भी कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इसको लेकर आरडब्ल्यूए की उच्चाधिकारियों से बातचीत चल रही है। लोगों को उम्मीद है कि आने वाले वर्ष में साहिबाबाद में सरकारी अस्पताल और कॉलेज का सपना पूरा होगा।
7. कूड़ा निस्तरण की समस्या हल होने की उम्मीद
कूड़ा निस्तारण की समस्या से लोग जूझ रहे हैं। जगह जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं, गंदगी फैली हुई है। कूड़ा निस्तारण के लिए डंपिंग ग्राउंड नहीं है। आरडब्ल्यूए कूड़ा निस्तारण के लिए कालोनियों में कूड़ा घर बनाने की मांग कर रही है, जिससे सड़कों पर फैलने वाली गंदगी से लोगों को निजात मिल सके। काफी समय से चल रहे संघर्ष को देखते हुए लोगों को उम्मीद है कि इस वर्ष सभी कालोनियों में कूड़ा घर का निर्माण किया जाएगा।
2016 में यह रहा खास
1. कौशांबी अपार्टमेंट रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर एनजीटी द्वारा दिए गए निर्देश के तहत कौशांबी में जीडीए और नगर निगम ने कई विकास कार्य कराए। कालोनी में सीवर ओवरफ्लो, टूटी सड़कों, नाला ओवरफ्लो की समस्या से लोगों को निजात मिली।
2. इंदिरापुरम में हाईकोर्ट के आदेश पर करीब सात वर्षों बाद सीवर लाइन की सफाई का काम हुआ। एओए की तरफ से हाईकोर्ट में दायर याचिका के बाद जीडीए ने कदम उठाया था।
3. इंदिरापुरम की आरडब्ल्यूए द्वारा दायर पीएआईएल की बदौलत लोगों को प्ले ग्राउंड मिला है, जिसमें खेलने के साथ ही लोगों के घूमने की सुविधा है। कुछ ही दिन पहले प्ले ग्राउंड का उद्घाटन हुआ है।
4. ग्रीन बेल्ट और डिवाइडर पर होर्डिंग्स से भी लोगों को छुटकारा मिला है। आरडब्ल्यूए ने पीएआईएल दाखिल की थी, जिसके तहत नगर निगम ने होर्डिंग्स के खिलाफ कार्रवाई की।
5. एनजीटी के आदेश पर कौशांबी के लोगों को अंदरूनी सड़कों पर भारी वाहनों से छुटकारा मिला है। कालोनी में बसों और ट्रकों के आवागमन से लोग परेशान थे। इसके साथ ही कालोनी की सड़कें पार्किंग में तब्दील हो गई थी।
बिल्डर की मनमानी से परेशान लोगों की सहूलियत के लिए कई एक्ट बने हैं लेकिन इन एक्ट पर इंप्लीमेंटेशन नहीं हो रहा है। जीडीए और नगर निगम से शिकायत के बाद भी कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। लोगों को मजबूरन कोर्ट का सहारा लेना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं के लिए जो भी एक्ट बने हैं, उनका सही से पालन हो।
- आलोक कुमार पूर्व अध्यक्ष, फेडरेशन ऑफ एओए
आरडब्ल्यूए विकास कार्यों को लेकर समय समय पर मांग करती आ रही है। अधिकारी समस्या सुनते हैं लेकिन उन्हें ठीक करने के लिए कोई कदम नहीं उठाते। अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। अधिकारी नहीं सुनते तो लोगों को कोर्ट का सहारा लेना पड़ता है।
- कैलाश चंद्र शर्मा उपाध्यक्ष, ट्रांस हिंडन आरडब्ल्यूए फेडरेशन