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Ghaziabad News: ऑडिट करने के लिए मांगे डेढ़ लाख, नहीं हो सकी जांच

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गाजियाबाद। क्रॉसिंग रिपब्लिक स्थित गौर ग्लोबल विलेज अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने और करोड़ों के कार्याें में अनियमितता की शिकायत के बाद डिप्टी रजिस्ट्रार ने ऑडिट के आदेश दिए। ऑडिटर ने जांच के लिए अधिक शुल्क मांग लिया। इस कारण ऑडिट नहीं हो सका। इस संबंध में एओए ने जिलाधिकारी को पत्र लिखा है। डिप्टी रजिस्ट्रार ने ऑडिटर से जवाब मांगा है।
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शिकायतकर्ता संजय झा सहित 31 निवासियों ने डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि एसोसिएशन बोर्ड ने निवासियों की सहमति और जनरल बॉडी मीटिंग के अनुमोदन के बिना बड़े वित्तीय एवं प्रशासनिक निर्णय लिए। नियमों के अनुसार नई प्रबंधन समिति को धारा 4 के अंतर्गत सूचीबद्ध (लिस्टेड) होने के बाद ही बड़े निर्णय लेने का अधिकार था, लेकिन बिना वैध प्रक्रिया अपनाए मेंटीनेंस और सुरक्षा एजेंसियों को बदल दिया गया।
नई एजेंसी को एलओआई जारी कर दी गई और बाद में निवासियों से प्रस्ताव मंगाकर प्रक्रिया को औपचारिकता मात्र बना दिया गया। निवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि सिविल कमेटी के लिए सात निवासियों के नामांकन बिना किसी पूर्व शर्त के निरस्त कर दिए गए, जबकि नोटिस में ऐसी कोई पात्रता निर्धारित नहीं थी। इसके अतिरिक्त लगभग 2 करोड़ की लिफ्ट अपग्रेडेशन परियोजना के लिए भी कोई स्वतंत्र समिति गठित नहीं की गई।
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फरवरी 2026 में 1 करोड़ से अधिक के पेंट कार्य के लिए बिना जीबीएम अनुमोदन के वेंडर नियुक्त किया गया और 21.38 लाख का अग्रिम भुगतान कर दिया गया, जबकि एग्रीमेंट बाद में निवासियों के साथ साझा किया गया। दोनों पक्ष सुनने के बाद डिप्टी रजिस्ट्रार वैभव कुमार ने उपेंद्र तिवारी (नोएडा) को जांच अधिकारी नियुक्त किया और 4 सप्ताह में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे, लेकिन उन्होंने ऑडिट के लिए लिखित में डेढ़ लाख रुपये एओए से मांगे, जिसे देने से इन्कार कर देने के कारण जांच नहीं हो सकी। डिप्टी रजिस्ट्रार का कहना है कि किसी भी जांच के लिए शुल्क तो लिया जाता है, हालांकि यह रकम ज्यादा है। हमने जांच अधिकारी से जवाब मांगा है और मामले की जांच भी की जा रही है।
सुमित अग्रवाल, एओए सचिव, गौर ग्लोबल विलेज का कहना है कि एओए चुनाव के लिए भी नियुक्त अधिकारी ने एक लाख रुपये मांगे, हालांकि चुनाव पर हमने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया और चुनाव नहीं हुए। ऑडिटर ने ऑडिट के लिए डेढ़ लाख रुपये मांगे। हमने इस संबंध में जीबीएम बुलाई तो निवासियों ने पैसे देने से मना कर दिया। सोसायटी कहां से धन लाएगी। हमने जिलाधिकारी और डिप्टी रजिस्ट्रार को पत्र दिया है। शिकायतकर्ता के सभी आरोप झूठे हैं।
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