पर्चे में हुई गड़बड़ी के चलते रालोद प्रत्याशी शमशाद चौधरी का नामांकन रद्द होने के बाद अब यहां भाजपा, बसपा और कांग्रेस-सपा गठबंधन के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होने जा रहा है। तीनों पार्टी के प्रत्याशी जोरशोर से चुनाव प्रचार में जुटकर लोगों को अपने साथ जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
राष्ट्रीय लोकदल की ओर से साहिबाबाद विधानसभा में शमशाद चौधरी को प्रत्याशी उतारे जाने के बाद माना जा रहा था कि वह बसपा और कांग्रेस-सपा के पारंपरिक अल्पसंख्यक वोट बैंक में सेंध लगाएंगे।
शमशाद का शहीदनगर, खोड़ा, पसौंडा आदि में खासा प्रभाव होने के चलते वह अल्पसंख्यक वोट को अपनी ओर करने के प्रयास में थे। मगर बुधवार को नामांकन पत्र में मामूली गलती के चलते उनका पर्चा रद्द होने के बाद विरोधियों ने राहत की सांस ली।
शमशाद ने बताया कि संपत्ति की कुल कीमत वाले कॉलम रिक्त छूट गया, हालांकि उसका पूरक पत्र भी उन्होंने दिया, मगर एसडीएम ने वह मानने से इंकार कर दिया। उधर, शमशाद का नामांकन रद्द होने के बाद अब विधानसभा में सीधा मुकाबला भाजपा, कांग्रेस-सपा गठबंधन और बसपा के बीच हो गया है।
बसपा और कांग्रेस दोनों अल्पसंख्यक वोट को अपनी ओर खींचने का प्रयास करेंगे। वहीं भाजपा प्रत्याशी सुनील शर्मा ब्राह्मण, वैश्य और अपने पारंपरिक वोट पर निशाना साधेंगे।
जाति-धर्म की संस्थाओं से साध रहे संपर्क
सुप्रीम कोर्ट ने भले ही विधानसभा चुनाव में जाति-धर्म के नाम पर वोट मांगने पर सख्ती से रोक लगाई हो, मगर प्रत्याशी जाति-धर्म के नाम पर बनी संस्थाओं के आकाओं से संपर्क साध रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो सभी पार्टिंयों के प्रत्याशी वैश्य समाज, ब्राह्मण समाज, सैनी समाज और मुस्लिम समाज जैसी संस्थाओं के संपर्क में हैं। प्रत्याशियों का मानना है संस्थाओं के अध्यक्षों का समर्थन मिलने के बाद वह एक साथ बड़ी आबादी को अपने पक्ष में कर सकते हैं।