साहिबाबाद क्षेत्र शालीमार गार्डन एक्टेंशन-प्रथम निवासी सेवानिवृत्त अध्यापक टॉमी वी ऑगस्टी से साइबर ठगों ने स्टॉक ट्रेडिंग में निवेश कराकर 34 लाख 53 हजार 813 रुपये ठग लिए। पीड़ित से मोटी रकम वसूलने के लिए साइबर ठगों ने उनके खाते में मुनाफे के रूप में 1.74 लाख रुपये भी भेजे। ठगों ने वित्तीय क्षेत्र में काम करने वाली नामचीन कंपनी टाटा कैपिटल मनीफाईमैक्स के फर्जी एप पर निवेश कराया और धनराशि ठगी। पीड़ित ने साइबर थाने में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
एडीसीपी पीयूष कुमार सिंह ने बताया कि साहिबाबाद निवासी टॉमी वी ऑगस्टी सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उनके अनुसार एक मई 2025 को इंटरनेट मीडिया के एक प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन देखा, जिसमें निवेश करने पर 20 से 30 प्रतिशत मुनाफे का झांसा दिया। उन्होंने अन्य जानकारी के लिए विज्ञापन ओपन किया। इसके बाद उनके मोबाइल पर अनुष्का डे नाम की महिला की कॉल आई। जिसने खुद को टाटा कैपिटल मनीफाईमैक्स कंपनी का प्रतिनिधि बताया। उन्होंने कंपनी को सेबी में रजिस्टर्ड बताया और उनके ग्रुप से जुड़ने के लिए मैसेज भेजा। उन्हें प्ले स्टोर से टाटा कैपिटल मनीफाईमैक्स के फर्जी एप डाउनलोड कराया और स्टॉक ट्रेडिंग में निवेश कराया। लाखों रुपये का निवेश करने के बाद उन्होंने अपने डी-मैट खाते से लाभांश के 1.74 लाख रुपये भी निकाले।
इसके बाद उन्हें साइबर ठगों पर पूर्ण विश्वास भी हो गया। उनके खाते में 53 लाख 74 हजार 761 रुपये दर्शाए गए। इसके बाद उन्होंने रुपये निकालने का प्रयास किया तो इस धनराशि का पहले 20 प्रतिशत कमीशन मांगा। इसके बाद 15 प्रतिशत कमिशन आठ लाख छह हजार 691 रुपये की मांग की। पीड़ित ने 19 लाख 20 हजार 948 रुपये का लाभ खाते में देखकर 8.06 लाख रुपये भी उनके बताए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। उन्होंने साइबर ठगों को कुल 34 लाख 53 हजार 761 रुपये स्टॉक ट्रेडिंग के नाम पर निवेश किए। उन्होंने फिर निवेश और लाभांश की धनराशि 53 लाख 74 हजार 761 खाते से निकालने का प्रयास किया लेकिन असफल रहे। साइबर ठगों ने पीड़ित को बताया कि उनका खाता एंटी मनी लॉड्रिंग अधिनियम के अंतर्गत अलर्ट होने के चलते धनराशि फ्रीज की गई है। इसके बाद साइबर ठगों ने अतिरिक्त धनराशि की मांग की। सेवानिवृत्त अध्यापक को साइबर ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने साइबर थाने में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया 34.53 लाख रुपये वापस कराने की मांग की है। एडीसीपी पीयूष कुमार सिंह ने बताया कि साइबर ठगों ने मोबाइल नंबर और बैंक खातों के आधार पर पहचान की जा रही है।