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Ghaziabad News: गड्ढों में जिम्मेदारी... हिचकोले खा रहा सफर

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दिल्ली मेरठ रोड पर मनन धाम मंदिर के सामने सड़क पर हुए गड्ढों से गुजरते वाहन। संवाद
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गाजियाबाद। सड़क पर गड्ढे हैं, सफर में जोखिम है और जिम्मेदारी को लेकर विभागों के अपने-अपने तर्क। बात हो रही है दिल्ली-मेरठ हाईवे की। बारिश थमे एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन हाईवे पर हालात जस के तस बने हुए हैं। कहीं सड़क की उखड़ी परत वाहन चालकों के लिए मुसीबत बनी हुई है तो कहीं पानी में छिपे गड्ढे हादसों को दावत दे रहे हैं। इस बदहाली के बीच लोग जाम में हिचकोले खा रहे हैं, सो अलग। दूसरी ओर यूपीसीडा, लोक निर्माण विभाग और नगर निगम के बीच जिम्मेदारी को लेकर खींचतान जारी है। नतीजा यह है कि सड़क पर गड्ढे बढ़ रहे हैं और व्यवस्था में जवाबदेही नजर नहीं आ रही। यह स्थिति तब है, जब दिल्ली-मेरठ हाईवे गाजियाबाद के साथ मोदीनगर, मुरादनगर और मेरठ के लोगों के लिए आवागमन का प्रमुख मार्ग है। रोजाना बड़ी संख्या में वाहन चालक इस रास्ते से गुजरते हैं।
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मोरटा चौकी से मनन धाम मंदिर तक आफत

हाईवे पर मोरटा चौकी और मनन धाम मंदिर के सामने हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। एक सप्ताह पहले बने गड्ढे अब गहरे और बड़े हो चुके हैं। मोरटा चौकी के पास दोपहिया वाहन चालक गड्ढों के कारण फिसलकर गिर रहे हैं, जबकि कार और ऑटो जैसे छोटे वाहन भी क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। इससे यहां अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है। सड़क की बदहाली से वाहन चालकों के साथ स्थानीय लोगों की मुश्किलें भी बढ़ रही हैं। आसपास के कारोबारियों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।



पांच किमी तक लग जाता है जाम

स्थानीय लोगों के मुताबिक, अवकाश के दिनों में भी यहां करीब एक किलोमीटर तक वाहनों की कतार लग जाती है, जबकि सामान्य कामकाजी दिनों में जाम की लंबाई पांच किलोमीटर तक पहुंच जाती है। मोरटा के आसपास और राजनगर एक्सटेंशन चौराहे के पास जलभराव के कारण आवागमन मुश्किल हो रहा है। सड़क पर भरे पानी के बीच गड्ढों का अंदाजा लगाना वाहन चालकों के लिए चुनौती बना हुआ है। जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से यातायात प्रभावित हो रहा है और हादसों का खतरा बढ़ गया है।
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17 करोड़ रुपये खर्च करने के दावे पर सवाल

लोक निर्माण विभाग ने मानसून से पहले हाईवे को गड्ढामुक्त करने के लिए 17 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा किया था। हालिया बारिश के बाद सड़क की जो स्थिति सामने आई है, उसने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल उठ रहा है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद सड़क की हालत इतनी जल्दी कैसे बिगड़ गई? मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता और उनकी निगरानी को लेकर भी जवाबदेही तय करने की जरूरत महसूस की जा रही है।



टालमटोल से बढ़ रहा लोगों का आक्रोश

हाईवे की बदहाली को लेकर स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों में नाराजगी बढ़ रही है। दुहाई निवासी देशपाल चौधरी ने सवाल उठाया कि संबंधित विभाग समय रहते समस्या का समाधान क्यों नहीं कर रहे हैं? हाईवे की बदहाली से जूझ रही जनता को राहत आखिर कब मिलेगी? कहा कि प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय तत्काल सड़क की मरम्मत और जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करनी चाहिए।



जिम्मेदारी से बच रहे विभाग, भुगत रही जनता

सड़क निर्माण और गड्ढों को भरने का काम जल्द शुरू कराया जाएगा। इस संबंध में कार्यदायी संस्था से बातचीत पूरी हो चुकी है। बारिश और जलभराव के कारण मरम्मत कार्य में बाधा आई थी, लेकिन अब इसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाएगा।

-राम राजा, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग



जिन क्षेत्रों में फिलहाल पानी भरा है, वे नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते हैं। ये क्षेत्र यूपीसीडा और अन्य संबंधित विभागों के अंतर्गत आते हैं। नगर निगम की सीमा के भीतर जल निकासी के इंतजाम किए गए हैं।
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-मिथिलेश कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम



मोरटा के आसपास का इलाका यूपीसीडा के अधीन नहीं है। मेरठ रोड पर कुछ क्षेत्र ही उनके अधिकार क्षेत्र में आता है।

-सलिल यादव, डीजीएम, यूपीसीडा

दिल्ली मेरठ रोड पर मनन धाम मंदिर के सामने सड़क पर हुए गड्ढों से गुजरते वाहन। संवाद

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