गाजियाबाद। नगर निगम की 1702 दुकानों का किराया डीएम सर्किल रेट से नहीं बल्कि मार्केट रेट पर तय होगा। शासन के निर्देश पर मंगलवार को नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक और महापौर सुनीता दयाल ने प्रेसवार्ता कर यह जानकारी दी। इस फैसले से दुकानदारों को बड़ी राहत मिली है।
करीब 27 साल पहले नगर निगम के गठन के बाद शहर में निगम द्वारा बनाई गई दुकानों को किराये पर दिया गया था। कई बार दुकानों का किराया बढ़ाने का मुद्दा सदन में उठता रहा लेकिन विरोध के चलते किराया वृद्धि नहीं की जा सकी। 2021 में नगर निगम ने डीएम सर्किल रेट के हिसाब से दुकानों का किराया बढ़ाने का फैसला लिया। किराये में 10 फीसदी की वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया। सदन में विरोध के बाद इस प्रस्ताव को शासन को भेज दिया गया था। पिछली कार्यकारिणी और बोर्ड की बैठक में पार्षदों ने सुझाव रखा की दुकानों का किराया डीएम सर्किल रेट के हिसाब से लगाने पर कम आए वाले छोटे दुकानदारों को दिक्कत होगी। पुनर्विचार की मांग रखी गई।
पार्षद राजीव शर्मा की ओर से कहा गया कि 10 फीसदी की वृद्धि का रेट एक समान करने पर उन दुकानदारों पर असर पड़ेगा जिनकी आय 10000 रुपये से भी काम है। शहर में कई इलाके ऐसे हैं जहां दुकानों पर आमदनी काफी कम है। महापौर सुनीता दयाल ने बताया कि शासन ने निर्देश दिया है कि मार्केट रेट के हिसाब से ही किराया तय किया जाए। अब नगर निगम एरिया, फुटफॉल और इनकम के आधार पर किराया तय करेगा। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने बताया कि मार्केट रेट के हिसाब से किराया वृद्धि करने पर 10 फीसदी से कम आएगा। किस दुकान का कितना किराया होगा क्षेत्रवार सूची एक हफ्ते में तैयार कर ली जाएगी। इसके बाद क्षेत्रवार सूची जारी कर दी जाएगी।
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मार्च तक किराया जमा करने पर मिलेगी एक साल की छूट
नगर आयुक्त ने कहा कि नई दर से जो किराया लागू किया जाएगा उसे मार्च तक जमा करने वाले दुकानदार को 2022-2023 के किराये से मुक्त किया जाएगा। मौजूदा वित्तीय वर्ष से किराया देना होगा। अगले महीने से क्षेत्रवार दुकानों का सर्वे कराया जाएगा। इसके बाद किराया जमा करने के लिए नोटिस जारी किया जाएगा। जो दुकानदार नोटिस के बाद भी किराया नहीं जमा करेगा उसे कोई छूट नहीं दी जाएगी। उससे दो वर्ष का किराया लिया जाएगा। म्यूटेशन कराने पर शुल्क यथावत ही रहेगा।